वियतनाम और नाथूला में मुंह की खाने के बाद गलवान घाटी में क्या होगी चीन की हालत

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चीन अक्सर 1962 के युद्ध के हश्र की धमकी देता है। हमारे राजनेताओं ने गलती न की होती तो शायद 1962 का भी परिणाम कुछ और होता। लेकिन चीनी उन दो युद्धों का जिक्र कभी नहीं करते न भारतीय कभी करते हैं। 1967 में भारत और चीन के सैनिक नाथूला दर्रे के पास आमने-सामने आ गए थे। इस जंग में भारत ने 300 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया था जबकि भारत के 65 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद 1979 में चीनियों की वियतनाम से जंग हुई थी जिसमें चीनियों को हार का मुंह देखना पड़ा था। अब एक बार फिर चीन फिर उसी मुहाने पर है। जानकार बताते हैं कि गलवान घाटी में भारत की सेना की स्थित चीन से काफी बेहतर है और वह चीन को एक और पटखनी दे सकता है।
बता दें पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून की रात भारत और चीन के सैनिकों के साथ हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। भारत ने भी मुंहतोड़ जवाब देते हुए चीन के 45 सैनिकों को मार गिराया।अब बातचीत से मामले को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
पीएम मोदी ने कहा है कि सैनिकों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। जाहिर है दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालता बन गए है। सवाल उठता है कि अगर दोनों देशों के बीच जंग हुई तो किसका पलड़ा रहेगा भारी।
आइए जानते हैं गलवान घाटी में किसका पलड़ा भारी रहने वाला है…
अमेरिकी सीएनएन ने कहा है कि अगर युद्ध हुआ तो भारत का पलड़ा भारी रह सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1962 से लेकर अब के हालात बदल गए हैं। अब भारत की ताकत बेहद बढ़ गई है।
परमाणु ताकत
-चीन 1964 में न्यूक्लियल पावर देश बना था, जबकि 1974 में भारत भी परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया
-भारत ने पिछले साल 10 नए परमाणु हथियार जोड़े
-चीन के पास जहां कुल 320 परमाणु हथियार हैं वहीं भारत के पास 150 हथियारों का जखीरा है
एयरफोर्स की ताकत
-भारत के पास हवा में मार करने वाले 270 फाइटर जेट हैं, जबकि जमीन पर मार करने वाले 68 एयरक्राफ्ट हैं
-चीन की सीमा पर भारत के कई एयरबेस हैं जहां से हमला किया जा सकता है
-चीन के पास सिर्फ 157 फाइटर जेट हैं, जमीन पर मार करने वाले एयरक्राफ्ट भी काफी कम है
-पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स के पास सीमा पर 8 एयरबेस हैं
-ये ज्यादातर सिविलियन एयरफिल्ड हैं,चीन को यहां हमला करने में दिक्कत हो सकती है
-तिब्बत और जिंगयांग के एयबेस काफी उंचाई पर है
-मौसम के चलते चीन के एयरक्राफ्ट ज्यादा गोलाबारुद और ईंधन के साथ उड़ान नहीं भर सकते
-भारत के मिराज 2000 और Su-30 जेट किसी भी मौसम में उड़ान भर सकते हैं
-जबकि चीन के जेट J-10 में इतनी ताकत नहीं है
ग्रांउड फोर्स की ताकत
-भारत की ग्राउंड फोर्स भी बेहद मजबूत है
-कश्मीर जैसे खतरनाक और अशांत इलाके में काम करने का लंबा अनुभव है
-चीन के पास असली लड़ाई का कोई अनुभव नहीं है
-चीनी सेना ने 1979 में वियतनाम खिलाफ लड़ी थी,उस लड़ाई में चीन की हार हुई थी
-तिब्बत और LAC इलाके में भारत के 225,000 फौज हैं
-जबकि यहां चीन के 200,000 से 230,000 सैनिक हैं
-भारत कभी भी यहां अपनी ताकत बढ़ा सकता है
-जबकि चीन के लिए इन इलाकों में पहुंचना आसान नहीं होगा
-भारत तिब्बत से सटे इलाके में रेल लाइनों पर हमला कर सकता है