उत्तराखंड आपदाः देवभूमि में देवदूत बने सेना के जवान, देश के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार

जब सामान्य लोगों के हौसले पस्त होने लगते हैं, आस टूटने लगती है और हाथ उठाकर ऊपर वाले से प्रार्थना करता है दूआ मांगता है तब लोगों की जिंदगी बचाने सामने आते हैं हमारे भारतीय सैनिक। अदम्य साहस से भरे, पूरे आत्मविश्वास के साथ, अविश्वसनीय क्षमता का परिचय देते हुए मानवता की रक्षा के लिए जुट जाते हैं पूरे जी जान से। मानवता की रक्षा के लिए भारतीय सेना, एयरफोर्स, नेवी, आईटीबीपी इसके साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों का जीवन बचाने में लग जाते हैं। उन्होंने अपनी इस क्षमता का एक बार नहीं कई बार उदाहरण पेश किया है। उत्तराखंड आपदा के दौरान भी उनका ये जज्बा फिर देखने को मिला है।

उत्तराखंड में चमोली स्थित ऋषिगंगा ग्लेशियर टूटने के बाद तबाही का भयानक मंजर देखने को मिला। ताजा खबरों के अनुसार अबतक 26 लोगों की मौत हो चुकी है और तकरीबन 197 लोग लापता हैं। ये आंकड़ा बढ़ सकता है। ऐसे में भारतीय सेना, एयरफोर्स, नेवी, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जांबाज जवान देवदूत बनकर सामने आए हैं।

देश के इन सशस्त्र बलों की टुकड़ियां हवाई मार्ग से तत्काल एनडीआरएफ की टीमों को मौके पर एयरलिफ्ट कराकर दिन-रात युद्ध स्तर पर राहत-बचाव का कार्य कर रही हैं। इतना ही नहीं बाढ़ में फंसे तमाम लोगों को निकालकर उनके जीवन को नया सवेरा दे रही हैं। इस आपदा के दौरान फंसे अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उन्हें राहत-सामग्री मुहैया कराई जा रही है।

भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर इंद्रानिल नंदी- उत्तराखंड में आई आपदा की जानकारी एयरफोर्स को 7 फरवरी की दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मिली थी। साढे 12 बजे तक एयरफोर्स ने अपने आवश्यक ट्रांसपोर्ट और हेलीकाप्टर्स को स्टैंडबाई मोड पर डाल दिया था।

आपदा की जानकारी के दौरान भारतीय वायुसेना के एक C-17, दो C-130, चार AN-32 और एक चिनूक के साथ चार ALH हेलीकाप्टरों की मदद ली जा रही है। जिनके जरिये एनडीआरएफ और नेवी के मार्कोज कमांडो की टीम के साथ करीब 20 टन राहत-सामग्री को एयरलिफ्ट कर रविवार को शाम 6 बजे तक ही देहरादून पहुंचा दिया गया था।

भारतीय वायुसेना के C-130 और AN-32 विमानों को जहां देहरादून के जौलीग्रांट में तैनात किया गया है। जबकि MI-17 और ALH हेलीकाप्टर्स को देहरादून, जौलीग्रांट और जोशीमठ में तैनात किया गया है, जहां से इन जवानों और राहत-सामग्री को मौके पर पहुंचाकर इस आपदा में फंसे लोगों की मदद की जा रही है।

विंग कमांडर इंद्रानिल नंदी ने बताया, जोशीमठ से रैणी में आर्मी के 200 जवान तैनात किए गए हैं। 400 जवान स्टैंडबाई यानी की तैयार बैठे हैं। आर्मी ने जोशीमठ में एक कंट्रोल रूम भी स्थापित कर लिया है और आर्मी एविएशन के दो चीता हेलिकॉप्टर लगातार इलाके में रैकी कर जरूरतमंद लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे हैं।

उन्होने बताया कि आपदा के दौरान तत्काल राहत प्रदान करने के लिए आर्मी की इंजीनियरिंग टास्क फोर्स को काम पर लगा दिया गया है। ये टास्क फोर्स जेसीबी मशीनों के जरिए जोशीमठ के मलबे को हटाकर उसमें फंसे लोगों को निकाल रही है। इसके अलावा आर्मी की मेडिकल टीम घायलों को फील्ड हास्पिटल के जरिए तक्काल इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल लोगों कोौ हेलिकाप्टर के जरिए एयरलिफ्ट किया जा रहा है।