UN में पाकिस्तान को भारत की खरी-खरी, तालिबान सरकार के तरीकों पर उठाए सवाल

लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान न करने वाले आतंक और कट्टरपंथ पर उपदेश देते हैं

संयु्क्त राष्ट्र (UN) में गुरुवार को भारत ने अफगानिस्तान में सत्ता हस्तानान्तरण की स्वीकार्यता पर सवाल खड़े किए। विदेश मंत्रालय में भारत की सचिव (पश्चिम) रीनत संधू ने लोकतंत्रों के समुदाय के 10 वें मंत्रालयी सम्मेलन ‘डेमोक्रेसी ऐंड रिसाइलेंस: शेयर्ड गोल्स’ में कहा कि यह जरूरी है कि अफगानिस्तान में नयी सरकार व्यापक आधार वाली और समावेशी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों सहित अफगान समाज के सभी हिस्सों का नेतृत्व करने वाली होनी चाहिए।
संधू ने कहा, ‘पिछले महीने से अफगानिस्तान में नाटकीय बदलाव देखे जा रहे हैं। बातचीत के बगैर और गैर-समावेशी तरीके से सत्ता हस्तांतरण हो रहा है, जो इसकी स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करता है।
इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जो आतंक का इस्तेमाल करते हैं और उसे पनाह देते हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों या संस्थानों का सम्मान नहीं कर सकते। बहुलवाद, विविधता, मानवाधिकार तथा स्वतंत्रता उनके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं जो आतंक और कट्टरपंथ का उपदेश देते हैं। लोकतंत्रों का समुदाय होने के तौर पर हमें आतंकवाद और आतंकी गतिवधियों को अंजाम देने वालों के खिलाफ दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए।
संधु ने इस पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद रखना चाहिए कि लोकतांत्रिक शासन न सिर्फ राष्ट्रीय या स्थानीय स्तरों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि समान रूप से वैश्विक मंच के लिए भी जरूरी है।’ उन्होंने विश्व संगठन में तत्काल सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘हमें सुधार के साथ बहुपक्षवाद की जरूरत है जो समकालिक वास्तविकताओं को प्रदर्शित करे और आज की चुनौतियों का हल करने के लिए उपयुक्त हो।
संधू ने कहा कि विश्व कोविड-19 महामारी से निपटने और इससे उबरने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में कोविड बाद की दुनिया समावेशिता, निष्पक्षता, समानता और मानवता पर आधारित वैश्वीकरण के एक नये दृष्टिकोण की मांग करती है।