दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियां भारत में बंद कर सकती हैं अपना कारोबार! जानिए क्या होगा असर

भारत में सेवा प्रदाता दो बड़ी टेलीकॉम कंपनी आने वाले दिनों में अपनी सेवाओं को बंद कर सकती हैं। इसका कारण हैं सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश जिसमें कंपनी को बकाया चुकाने का आदेश जारी किया गया है। इसके पीछे एक दूसरी बड़ी वजह ये मानी जा रही है कि कंपनी लगातार घाटे में चल रही है जिसकी वजह से इन कंपनियों को भारत में चलाना मुश्किल हो गया है। शनिवार को कंपनी को बोर्ड बैठक में इसके भविष्य पर फैसला हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो हजारों लोगों की रोजी रोटी पर संकट आ सकता है।
भारत में कंपनी के भविष्य पर आज होगा फैसला
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, डीओटी की रकम चुकाने के लिए कंपनी के पास क्या विकल्प हैं इस पर शनिवार को होने वाली बैठक में फैसला लिया जा सकता है। बतादें दिसंबर 2019 में वोडा-आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा था अगर सरकार द्वारा आर्थिक मदद मुहैया नहीं कराई जाती है तो कंपनी आने वाले दिनों में आपना काम काज समेट सकती है।
वोडा-आइडिया पर 53 हजार करोड़ का एजीआर है बकाया
दरअसल वोडाफोव-आइडिया कंपनी पर 53 हजार करोड़ रुपये का एजीआर (अडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया है। कंपनी तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के दौरान 6,439 करोड़ का घाटा हुआ है। यह लगातार छठी तिमाही है जब कंपनी को इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में भी काफी गिरावट दर्ज की गई है।
NCLT में जा सकती हैं कंपनियां
वीएम पोर्टफोलियो के रिसर्च हेड विवेक मित्तल का कहना है कि ‘वोडाफोन आइडिया के पास पैसे नहीं हैं। ऐसे वो NCLT में जा सकती है, क्योंकि उसे 17 मार्च को मामले की होने वाली अगली सुनवाई से पहले बकाये का भुगतान करना है। अगर इस मामले को स्वीकार कर लेता है तो बैंकरप्टसी लॉ के तहत बकाया चुकाने पर रोक लग जाएगी और इस तरह कंपनी को भुगतान नहीं करना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाते हुए सभी कंपनियों के उच्च पदस्थ अधिकारियों को तलब कर लिया। इन कंपनियों ने सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपए का बकाया नहीं चुकता किया है। इस पर कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि बकाए के भुगतान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इन कंपनियों को फटकार लगाते हुए 14 फरवरी की खत्म होने तक 1.47 लाख करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। 16 जनवरी को जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने दूरसंचार कंपनियों को सरकार को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) चुकाने के आदेश दिए थे।