बंगाल में खिसकने लगा है टीएमसी का जनाधार ! बयानों में झलका ममता बनर्जी का डर

पश्चिम बंगाल में 2021 में चुनाव होने हैं। बयानबाजी का दौरा चल पड़ा है। एक दूसरे पर आरोप लगाने के साथ जाति, धर्म और क्षेत्रवाद से भरे बयान महौल को तनावपूर्ण कर रहे हैं। भाजपा जहां राष्ट्रवाद के नारों के जरिए लोगों में पैठ बनाने की जुगत लगा रही है तो वहीं ममता बनर्जी आमार सोनार बंगला के जरिए सत्ता पर एक बार फिर कब्जा करना चाहती हैं। इन सब के बीच लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाली भाजपा के हौसले बुलंद हैं और उनका जनाधार धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। तो क्या भाजपा के बढ़ते जनाधार से ममता बनर्जी घबराई हैं, क्या उन्हें सत्ता जाने का डर सता रहा है…
लौटते हैं 2011 विधानसभा चुनाव की तरफ, यह वही साल था जब ममता बनर्जी ने लेफ्ट के किले को ढहाते हुए 184 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके ठीक दो साल पहले 2009 में उन्होंने अपने सांसदों की संख्या 19 पहुंचा दी थी। ठीक यही पश्चिम बंगाल में भाजपा कर रही है। 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने अपने सांसदों की संख्या 2 से 18 तक पहुंचा दी, और अब यहां विधानसभा चुनाव होने हैं। तो क्या भाजपा टीएमसी के किले को ध्वस्त कर सकती है…
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं, चुनाव से पहले ममता बनर्जी के बयानों से लगता है कि उन्हें इस बार जीत पर संदेह सा हो चला है। राज्य के बीरभूमि में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, मुझे विश्व भारती के खिलाफ की जा रही अपमानजनक टिप्पणी पसंद नहीं।
ममता बनर्जी ने कहा एक बार फिर आमार सोनार बंगला के जरिए बंगाल के लोगों को सावधान करने की कोशिश की है। उन्होने कहा बंगाल की संस्कृति को नष्ट करने का षडयंत्र रचा जा रहा है। हिंसा और विभाजनकारी राजनीति बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा वो सोचते हैं रुपए देकर विधायक खरीदेंगे और टीएमसी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा उन्हें यह समझना चाहिए कि टीएमसी कैसे बनी, उन्हें जाकर देखना चाहिए।
रवीन्द्रनाथ टैगोर को राजनीति में घसीटने के साथ ही उन्होंने कहा, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जिस दिन रचना की थी अमार सोनार बंगला उसी दिन सब कुछ तय हो गया था। अब हमें किसी की जरुरत नहीं। बंगला मतलब सोनार बांग्ला। दिल्ली के लोगों को क्या पता रवीन्द्रनाथ टैगोर कौन सी माटी के हैं।
जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, बंगाल में अब ऐसी राजनीति हो रही है जिससे हम अपना धर्म भूल रहे हैं। उन्होंने कहा विवेकानंद को केवल माला पहनाने से काम नहीं चलेगा, रामकृष्ण को जानना होगा, दक्षिणेश्वर को जानना होगा। उन्होंने कहा, आज यहां चुनाव हो रहे हैं तो यहां आ रहे हैं। आज से पहले कहां थे। ये माटी हमारी सरस्वती है। यही गंगा यमुना है। यही सोनार माटी है। इसी माटी पर हेट पॉलिटिक्स हो रही है।
बीरभूमि में ममता बनर्जी का यह भाषण आखिर किस तरफ इशारा कर रहा था। क्या बंगाल भारत से अलग है या फिर रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल पश्चिम बंगाल के हैं। या फिर वह किस संस्कृति के खत्म होने की बात कर रही हैं, अमार सोनार बंगला से उनका क्या तात्पर्य है, उन्होंने कहा है उन्हें किसी की जरुरत नहीं। क्या ये बयान उनके डर को नहीं दर्शाते। बहरहाल 2021 में चुनाव होने हैं, उनकी बाते कहां तक सार्थक होती हैं ये तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा फिलहाल बंगाल में भाजपा का हौसला बुलंद है और इससे ममता का डरना लाजिमी भी है…