प्रेरणा देती है BSF जवान की ये कहानी- जज़्बा है तो असंभव कुछ भी नहीं…

हरप्रीत कहते हैं- हमें अपने सपनों का पीछा कभी नहीं छोड़ना चाहिए, 2017 में चौथी बार सिविल सेवा की परीक्षा दी थी 454वीं रैंक आई। चयन इंडियन ट्रेड सर्विस में हुआ था। हमने बीएसएफ छोड़कर आईटीएस ज्वाइन कर लिया। 2019 में ही फिर से यूपीएससी क्रैक करने में कामयाब रहे और 19वीं रैंक हासिल की..

कुछ कर गुजरने का जज़्बा ही किसी को महान बनाता है। लीक से हटकर काम करने वालों को दुनिया सलाम ठोंकती है। अनुसरण भी उसी का करती है। बीएसएफ के जवान ने एसा ही किया। एक जज़्बा था बड़ा अधिकारी बनने का। कुछ भी हो बनकर रहूंगा, निरंतर कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और लगन के दम पर सीमा पर हार न मानने वाले ने जीवन का तराशने में भी हार नहीं मानी और उसने वह कर दिखाया जो उसने सपना संजोया था।
भारत बांग्लादेश सीमा पर तैनाती पाए हरप्रीत सिंह 2019 में आईएएस अधिकारी बने। वह बताते हैं ड्यूटी के बाद बचे समय में वह अपनी तैयारियों पर पूरा ध्यान लगाते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी क्रैक कर ऐआईआर 19 रैंक हासिल की।

हरप्रीत सिंह को ये सफलता थाली में सजाकर नहीं मिली। लंबे संघर्ष और हार न मानने के जज्बे ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनकी तैयारी का सफर 2013 से शुरु हो गया था। इसके पहले हरप्रीत ने आईबीएम मे काम किया करते थे। लेकिन इस दौरान भी उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना था।
बता दें, हरप्रीत सिंह का जन्म लुधियाना में हुआ था। 2016 में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर बीएसएफ ज्वाइन किया था। उनकी पहली पोस्टिंग भारत-बांग्लादेस सीमा पर हुई थी। वह बताते हैं कि सीमा पर उनकी तैनाती उन्हें अलग तरह का माहौल देती थी, वह कहते हैं मुश्किलों से लड़ना उन्हें बेहद पसंद था।

हालां कि उन्होंने यह भी कहा, सबकुछ ठीक था लेकिन सपना आईएएस बनना था, इसलिए ड्यूटी के बाद समय निकालकर यूपीएससी की तैयारी करने में जुटे थे। आखिरकार पांचवें प्रयास में यह सफलता हासिल कर ली।
उन्होने बताया हमने आईएएस बनने के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया। हमने पांच सूत्रों को अपने अन्तःकरण में धारण कर लिया था। वह पांच सूत्र थे, सभी विषयों पर बराबर महत्व देना, दूसरा दृढ़ निश्चय के साथ काम करते रहें, तीसरा, लक्ष्य स्पष्ट रखें, भटकें नहीं, आत्मविश्वास कम मत होने दें, हमेशा सकारात्मक नजरिए से देखें।

हरप्रीत बताते हैं लक्ष्य उनके दिमाग में बिल्कुल साफ था। कोई भी चीज उन्हें भटका नहीं सकती थी। ड्यूटी के बाद अपना पूरा समय यूपीएससी की तैयारी में लगाया।