यूपी में किराएदारी कानून लागू- राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अध्यादेश को दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश में नया किराएदारी लागू हो गया, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल न अध्यादेश पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी। इस कानून के लागू होने के बाद कोई भी मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा पाएगा। इसके अलावा किरायेदारी भी अब अनुबंध के आधार पर ही तय की जाएगी। नए किराएदारी कानून में किराएदार को भी कई जिम्मेदारियां निभानी होंगी। नए किराएदारी कानून के अनुसार मकान मालिक गैर आवासीय पर सात फीसदी और आवासीय पर पांच फीसदी सालाना किराया बढ़ा सकेगा।
नए किराएदारी कानून के तहत किराएदारों पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। किराएदारों पर लागू पाबंदियों से जरिए मकान मालिक के अधिकारों के संरक्षण की कवायद की गई है। प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार- राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ ही सोमवार से प्रदेश में संबंधित अध्यादेश लागू हो गया है।
नए किराएदारी कानून लागू होने के बाद 48 वर्ष पुराने उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराया तथा बेदखली विनियमन) अधिनियम-1972 के स्थान पर लागू किए गए अध्यादेश के तहत लिखित करार (अनुबंध) के बिना अब भवन को किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। करार के लिए भवन स्वामी और किरायेदार को अपने बारे में जानकारी देने के साथ ही भवन की स्थिति का भी विस्तृत ब्योरा देना होगा। इसमें दोनों की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख होगा।
अध्यादेश के मुताबिक एग्रीमेंट के दो महीने के भीतर मकान मालिक और किराएदार रूप से इसकी जानकारी ट्रिब्यूनल को देनी होगी। अगर एग्रीमेंट एक साल से काम का है तो इसकी सूचना नहीं देनी होगी। किरायेदारी के विवाद निपटाने के लिए रेंट अथॅारिटी एवं रेंट ट्रिब्यूनल की गठन की व्यवस्था की गई है। एडीएम स्तर के जहां किराया प्राधिकारी होंगे वहीं जिला न्यायाधीश खुद या अपर जिला न्यायाधीश किराया अधिकरण की अध्यक्षता करेंगे। अधिकतम 60 दिनों में मामले निस्तारित किए जाएंगे।