राजनीतिक अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का बेहतरीन फैसला, जानिए क्या कहा

अर्से से इस पर चर्चा चल रही है, अर्से से राजनीतिक दल एक दूसरे पर राजनीति के अपराधीकरण का आरोप लगाते रहे हैं। चुनाव आयोग भी इसे लेकर राजनीतिक दलों को हिदायत दे चुका है। अब तो राजनीति में अपराध जीत का मानक सा बन गया है। मतदाता भी अब इसे मान कर चलने लगे हैं कि जो नेता जितना दबंग होगा काम उतनी ही तेजी से होगा, लेकिन अगर अपराधी राजनीति में आएंगे तो एक स्वस्थ लोकतंत्र के मायने क्या रह जाएंगे और शायद अब यही हो रहा है तभी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला सामने आया है जो यह बताने के लिए काफी है कि राजनीति अपराधियों के किस कदर अटी पड़ी है।
चुनाव आयोग की नहीं सुनते राजनीतिक दल और नेता
दरअसल राजनीतिक दल या नेता चुनाव आयोग की हिदायतों का पालने करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। चुनावों के दौरान अमर्यादित बयान, ऐसे बयान जो अभद्रता की हर सीमा को तोड़ देती है, बीते चुनाव में ऐसा देखने सुनने को मिला। चुनाव आयोग ने महज दो चार दिन प्रचार पर प्रतिबंध लगाया, इससे ज्यादा कुछ नहीं। इसके पीछे बड़ी वजह ये है कि चुनाव आयोग के पास उम्मीदवारी निरस्त करने या किसी राजनीतिक दल की मान्यता खत्म करने का अधिकार नहीं है। हालांकि आयोग ने कई बार अपनी शक्तियों को बढ़ाने की मांग की लेकिन उसकी कोई सुनने वाला नहीं। इन्ही स्थितियों को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के अपील की है कि वह राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करें। अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहतरीन पहल की है।
राजनीतिक दल बताएं क्यों दिया दागियों को टिकट
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर राजनीतिक दलों से पूछ लिया कि आप अपराधियों को टिकट क्यों देते हैं, अगर दागी उम्मीदवारो को टिकट दे रहे हैं तो अपनी वेबसाइट पर दागी को टिकट देने की वजह का पूरा व्यौरा दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राजनीतिक दल ये भी स्पष्ट करें कि वह एक बेदाग उम्मीदवार को टिकट क्यों नहीं दे पाए।
दागी उम्मीदवारों के बारे यहां देनी होगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राजनीतिक दलों को लोकसभा या विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों के चयन के 48 घंटे के भीतर या नामांकन के दो हफ्ते के अंदर दागी उम्मीदवारों के लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी वेबसाइट पर देंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया साइट पर, एक क्षेत्रीय और एक राष्ट्रीय अखबार में भी इसे प्रकाशित कराना होगा।
सिर्फ चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर उम्मीदवारों का चयन गलत
जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस रवीन्द्र भट की पीठ ने कहा सिर्फ चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर उम्मीदवारों का चयन नहीं किया जा सकता है। योग्यताओं व उपब्धियों का ख्याल रखना भी बेहद जरुरी है। कोर्ट ने कहा हमने यह संज्ञान में लिया है कि पार्टियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि उन्होंने आखिर क्यों दागियों को उम्मीदवार बनाने के लिए चुना? कोर्ट ने कहा हम इसलिए संविधान के अनुच्छेद 129 और 142 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं और ये निर्देश जारी कर रहे हैं।
ऐसा नहीं किया तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी स्पष्ट कर दिया कि अगर राजनीतिक दल अपराधी उम्मीदवारों के बारे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं या उन्होंने इसे अनुपयोगी जताने जैसी धारणा बनाई है तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए। ऐसा न किए जाने पर पार्टी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।