किसान महापंचायत को SC की दो टूकः क्या अब आप शहर के अंदर उत्पात मचाना चाहते हैं

'आपको प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन राजमार्गों को बंद कर लोगों को परेशान नहीं कर सकते

केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट मे किसान महापंचायत को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को फटकार लगाते हुए कहा, क्या अब आप शहर के अंदर उत्पात मचाना चाहते हैं। क्या शहर के व्यापारी अपना रोजगार बंद कर दें या आपके प्रदर्शन से लोग खुश होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप लोगों ने शहर का दम तो पहले ही घोंट रखा है, अब क्या है आपका इरादा। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
दरअसल किसान महापंचायत कृषि कानूनों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मांग की थी। किसान महापंचायत कानूनी वैधता को चुनौती देने के बावजूद अपना प्रदर्शन जारी रखे हैं उनके इस रुख पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक बार कानूनों को अदालतों में चुनौती देने के बाद विरोध करने वाले किसानों को विरोध जारी रखने के बजाय व्यवस्था और अदालतों में अपना विश्वास करना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘आपको प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन राजमार्गों को बंद कर लोगों को परेशान नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा,’ पहले आप शहर के बाहर सड़कों को अवरोध किया और अब आप शहर के भीतर आना चाहते हैं। जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें कहीं।
पीठ ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान यातायात बाधित कर रहे हैं, ट्रेनों और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों को निशाना बना रहे हैं, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और फिर भी प्रदर्शन करने की मांग के लिए याचिका दायर कर रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शन करने की इजाजत कैसे दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता किसान महापंचायत संगठन से कहा, पहले आप हलफनामा दायर कर बताएं कि फिलहाल सीमाओं पर बैठे प्रदर्शकारियों से आपका कोई संबंध तो नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और अटॉर्नी जनरल को देने का भी आदेश जारी किया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा सड़क की ‘नाकेबंदी’ को हटाने के लिए क्या कर रही है?
गुरुवार को जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि किसी समस्या का समाधान न्यायिक मंच, आंदोलन या संसदीय बहस के माध्यम से किया जा सकता है , लेकिन सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है और यह एक स्थायी समस्या नहीं हो सकती है।
पीठ ने कहा, ‘हम पहले ही कानून बना चुके हैं और आपको इसे लागू करना होगा। अगर हम अतिक्रमण करते हैं तो आप कह सकते हैं कि हमने आपके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। कुछ शिकायतें हैं जिनका निवारण किया जाना चाहिए।