नागरिकता पर बवालः दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह कैसे फैलती गई विरोध की आग…

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीनबाग के अलावा इंद्रलोक, चांदबाग, जाफराबाद, खुरेजी और सुंदरनगरी जैसे इलाकों में प्रदर्शन हुए हैं। आलम यह है कि दिल्ली के शाहीनबाग में चल रहे प्रदर्शन की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दो महीने से भी ज्‍यादा समय से शाहीन बाग में चल रहे विरोध-प्रदर्शन का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकार भी नियुक्त किया है। प्रदर्शनकारियों में ज्‍यादातर महिलाएं हैं।
जाफराबाद में धरने पर बैठी महिलाएं
इस दौरान शनिवार रात को दिल्ली के जाफराबाद इलाके में भी महिलाएं सड़क पर उतर गईं। वो यहां के मेट्रो स्टेशन के समीप धरना दे रही हैं। इस दौरान सड़क जाम हो गया है। इसी दौरान चांदबाग में भी रविवार सुबह 11 बजे वजीराबाद-गाजियाबाद रोड बंद कर दिया गया। खुरेजी में भी महिलाएं सड़क पर आ गईं।
चंद्रशेखर ने किया था मार्च का आह्वान
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने चांदबाग से राजघाट तक मार्च का आह्वान किया था। रविवार को भारत बंद का भी आह्वान किया गया था। इसलिए चांदबाग में धरने पर बैठी महिलाएं और पुरुष राजघाट तक मार्च निकालना चाहते थे। इसलिए वो सुबह 11 बजे सड़क पर उतर गए। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि इतने दिन से महिलाएं धरने पर बैठी हैं, लेकिन केंद्र सरकार CAA को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इसलिए सड़क पर आना आंदोलन का दूसरा चरण है।
आवाजादी बंद हो जाएगी तो सरकार को समझ में आएगा
चांदबाग में युवाओं की अगुवाई कर रहे सलमान सिद्दिकी खुद को आरडब्लूए फेडरेशन ऑफ दिल्ली का उपाध्यक्ष बता रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क पर इसलिए उतरे हैं, क्योंकि हम सीएए-एनआरसी और आरक्षण को लेकर भीम आर्मी के भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं। महिलआएं 45 दिन से धरने पर हैं। आवाजाही बंद हो जाएगी तो सरकार को समझ में आएगा।
सरकार अहंकार से है चूर
प्राईवेट जॉब करने वाली रूही यहां महिलाओं का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने नवभारत टाईम्स से बातचीत में कहा कि सरकार अहंकार से चूर है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में मां-बहन सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। वो सवाल पूछती हैं कि तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार हमारे साथ थी लेकिन अब वो कहां हैं? उनका कहना है कि ये लंबी लड़ाई है ये सबको समझ में आ रहा है, इसलिए हम लड़ने को तैयार हैं।