किसान आंदोलन पर बोले रामगोविंदः अन्नदाता भगवान, उनका अपमान मत कीजिए

किसान आंदोलन पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने विधानसभा में जमकर हंगामा काटा। विधानसभा में चर्चा की मांग न माने जाने पर विपक्षी नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। इसके बाद सपा, बसपा और कांग्रेस से सदस्यों ने बहिर्गमन कर दिया। उनसे इस रवैये से सदन में प्रश्नकाल नहीं हो सका।
इसके बाद सदन की कार्यवारी शुरु होने पर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराने की मांग की।
इस दौरान उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा। उन्होने कहा पूरे सदन को आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करे।
रामगोविंद चौधरी ने कहा, आज हमारा लोकतंत्र दिखावटी हो गया है। कोई आंदोलन नहीं कर सकता है। सपा कार्यकर्ता किसानों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं तो उन पर लाठी चार्ज किया जा रहा है, उन्हें जेल भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा, यदि आज सदन में मुख्यमंत्री न होते तो सत्ता पक्ष के कई लोग हमारी बात का समर्थन करते और सराहना करते। उन्होंने कहा दोनों तरफ के 99 फीसदी लोग किसानी से जुड़े हैं।
इस दौरान किसान आंदोलन पर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाके हुए उन्होंने कहा, सरकार के नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं। यह किसानों के जीवन से जुड़ा कानून है। उन्होने कहा अगर किसान इसे नहीं मान रहे हैं तो सरकार इसे तत्काल वापस ले।
उन्होंने कहा, किसानों के अन्न में भगवान हैं और अन्नदाता भगवान स्वरूप इसलिए उसका अपमान न करे सरकार। उन्होने कहा, जनता भी जानती है सरकार की असलियत,किसके लिए सारी योजनाएं बन रही हैं। समय है संभल जाए वरना जनता बताएगी कैसे सरकार चलाई जाती है।