पीएम मोदी की ‘मन की बात’ से किसान इग्नोर, स्वदेशी पर जोर

साल के अंतिम मन की बात के जरिए देश वासियों को पीएम मोदी ने किया संबोधित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2020 के आखिरी मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया। अपने 30 मिनट के संबोधन में पीएम ने उन्होने कोरोना वायरस, आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल समेत तमाम बिंदुओं पर लोगों से बात की। लेकिन इस 30 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान के सबसे ज्वलंत मुद्दे किसान और नए कृषि कानून का जिक्र तक नहीं किया। उनके इस 30 मिनट के संबोधन से किसान गायब थे, उन्होंने स्वदेशी पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, साल 2020 में तमाम बाधाएं आईं, तमाम चुनौतियां आईं, कोरोना के कारण दुनिया में सप्लाई चेन को तोड़ कर रख दिया, इन सबके बावजूद देश ने हिम्मत नहीं हारी, हमने हर संकट से सबक लिया और चुनौतियों का सामना किया।
पीएम मोदी ने नए कृषि कानून और किसान आंदोलन को लेकर कई मौकों पर अपनी बात रखी है। इस दौरान उन्होंने नए कृषि कानून को लेकर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया। कई सवाल भी उन्होंने उठाए, उन्होंने कहा था , कांग्रेस ने अपनी सत्ता के समय कांट्रैक्ट फार्मिंग पर जोर देती रही। स्वामीनाथम आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बात करती रही लेकिन कभी इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई।
उन्होंने कहा था, अगर आज हमने इसे लागू करने की हिम्मत दिखायी है तो उन्हें तकलीफ क्यों है? उन्होंने कहा था, उन्हें तो तकलीफ इस बात की है कि इसे मोदी ने क्यों लागू कर दिया। हालांकि साल के अंतिम मन की बात के जरिए किसानों के मुद्दे पर पीएम मोदी की बात लोग सुनना चाहते थे लेकिन उन्होंने किसानों के मुद्दों को लेकर कुछ भी नहीं कहा।

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान फिलहाल दिल्ली और आसपास के इलाकों में तकरीबन एक माह से डेरा डाले हैं। पीएम मोदी की मन की बात के दौरान सिंधु सीमा बार्डर पर डटे किसानों ने थाली पीटकर विरोध जताई। जानकारी के अनुसार सोमवार से किसान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं को बंद करने का ऐलान किया है।

किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने रविवार को कहा था कि अब किसान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं को बंद करेंगे। इस दौरान उन्होंने किसानों से अह्वान किया था कि वह अपने साथ राशन-पानी लेकर आएं। सरकार से उन्हें किसानों को किसी प्रकार की सुविधा देने पर आशंका है।