निर्भया केसः गुनाहगारों के परिजनों को तिहाड़ जेल का पत्र, बताइए आखिरी मुलाकात कब करेंगे

निर्भया सामुहिक दुष्कर्म और हत्या (16 December 2012) आठ साल हो गए। गुनाहगार अब भी जेल की सलाखों के पीछे कानूनी दांवपेच में मशगूल हैं। तीन डेथ वारंट जारी हो चुका है लेकिन फांसी होगी या नहीं असमंजस बरकरार है। हालांकि निर्भया की मां आशा देवी इस बार संतुष्ट दिखाई दे रही हैं। उनका मानना है कि 3 मार्च को बेटी के गुनाहगारों को फांसी हो जाएगी, लेकिन कानूनी दांव पेच के माहिर वकील एपी सिंह अभी भी फांसी रुकवाने की हर मुमकुन कोशिश में लगे हैं। बहरहाल तिहाड़ जेल प्रशासन ने सभी चारों दोषियों को लिखिल सूचना दी है कि वह अंतिम मुलाकात कब करना चाहते हैं। पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि मुकेश और पवन अंतिम मुलाकत कर चुके हैं। अक्षय और विनय से भी परिजनों से अंतिम मुलाकात के लिए कहा जा चुका है।
गुनाहगारों के परिजन बताएं अंतिम मुलाकात कब करनी है
दरअसल जेल मैनुअल के अनुसार फांसी लगने से 14 दिन पहले गुनाहगारों के परिजनों को पत्र लिख लिखकर सूचना दी जाती है कि वह अंतिम मुलाकात का वक्त और दिन बताएं। निर्भया के दो गुनाहगार मुकेश और पवन अंतिम मुलाकात कर चुके हैं जबकि अक्षय और विनय से भी पूछा गया है कि वो अंतिम बार अपने परिवारवालों से कब मिलना चाहते हैं।
दो बार रद्द हो चुका है डेथ वारंट
बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषियों को तीसरी बार डेथ वारंट जारी किया है। इस नए डेथ वारंट के मुताबिक चारों गुनाहगारों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी पर चढ़ाया जाएगा। इससे पहले दो बार डेथ वारंट रद्द किया जा चुका है। पहले 22 जनवरी को तथा दूसरे डेथ वारंट में 1 फरवरी को फांसी की तारीख तय की गई थी।
संतुष्ट इसलिए हूं कि तीसरी बार डेथ वारंट जारी हो गयाः आशा देवी
हालांकि निर्भया की मां आशा देवी तीसरी बार डेथ वारंट जारी करने के पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नजर आती हैं। उन्होंने कहा, मै बहुत खुश हूं, क्योंकि कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वारंट जारी किया है। हमने बहुत संघर्ष किया है, आठ से से कायदे से सोए नहीं हैं और न ही कभी ढंग से अपने घर को देखा। संतुष्ट इसलिए हूं कि आखिरकार डेथ वारंट जारी हो गया। उम्मीद है कि दोषियों को 3 मार्च को फांसी दी जाएगी।
तीन गुनाहगारों की फांसी तय
निर्भया के चार गुनाहगारों मुकेश कुमार सिंह, विनय कुमार शर्मा, अक्षय और पवन को फांसी होनी है। चार में से तीन गुनाहगार अपने सारे विकल्प आजमा चुके हैं और उनकी फांसी होना तय है। चौथे गुनाहगार पवन गुप्ता ने अभी तक न तो सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेविट पिटीशन लगाई है और न राष्ट्रपति से दया की गुहार की है। पवन गुप्ता अगर अपने विकल्पों का इस्तेमाल करता है तो 3 मार्च की फांसी भी टल सकती है।
पवन के पास फांसी से बचने के ये हैं विकल्प
पवन की तरफ से फांसी के दिन से ठीक पहले यानी 29 फरवरी के बाद क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की जाती है तो सुनवाई में समय लगने के कारण 3 मार्च की सुबह फांसी टल सकती है। इसके अलावा पवन के पास एक विकल्प ये भी है कि वो राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाये और जब तक राष्ट्रपति की ओर से इस संबंध में कोई फैसला आये तो उस कारण भी देरी हो सकती है।