कृषि कानून- किसानों ने पीएम मोदी की अपील ठुकराई, आंदोलन और तेज करने की दी चेतावनी

किसानों ने दी आदोलन तेज करने की चेतावनी
किसानों की आर्थिक दशा सुधारने और उनके उत्पाद की उचित कीमत को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने नया कृषि कानून बनाया है। इस कानून में किसानों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वह अपने उत्पाद को समीप की मंडियों के अलावा कहीं भी अपने अत्पाद को बेच सकते हैं। इसके अलावा उन्हें कांट्रैक्ट फार्मिंग की भी छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए अन्य प्रावधान किए हैं।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को फिक्की के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसानहित की बात कही थी। उन्होंने कहा था, हम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें अधिक समृद्ध बनाने के लिए ये सभी प्रयास कर रहे हैं। आज, भारत के किसान अपनी उपज को मंडियों और साथ ही बाहर भी बेच सकते हैं।” उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र और उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों की दीवारों को हटाया जा रहा है।
पीएम मोदी की इस अपील के बावजूद किसानों ने नए कृषि कानून को लेकर 17 दिनों से जारी आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। किसान संगठनों ने अपने ताजा बयान में कहा है कि रविवार को दिल्ली-जयपुर एवं आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे को जाम करेंगे। इस दौरान किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। किसानों की चेतावनी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने शहर की सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है।
किसान आंदोलन से जुड़ी अहम जानकारियां
-नए कृषिक कानून को लेकर शनिवार को फिक्की के कार्यक्रम में किसान हितों को लेकर कही गई पीएम मोदी की बातों को किसान संगठनों ने नकार दिया है। उन्होंने 17 दिनों से जारी आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
-किसान नेताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी सोमवार को सभी जिला कार्यालयों में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेंगे और सुबह 8 से शाम 5 बजे तक भूख हड़ताल करेंगे।
-कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान बीते 17 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं
-दिल्ली पुलिस ने किसान आंदोलन को देखते हुए शहर की सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है।
-किसान नेताओं ने जयपुर-दिल्ली तथा यमुना एक्सप्रेसवे को शनिवार को अवरुद्ध करके अपने आंदोलन को तेज करने की घोषणा की है -यातायात पुलिस ने यात्रियों को ट्वीट कर सिंघू, औचंदी, प्याऊ मनियारी और मंगेश सीमाओं के बंद होने की सूचना दी
-लोगों को लामपुर, सफियाबाद, साबोली और सिंघू स्कूल टोल टैक्स सीमाओं से आनेजाने की सलाह दी गई है
किसान नेता सरकार से वार्ता के लिए तैयार लेकिन…
-किसान नेता अपनी मांगों पर कायम हैं लेकिन वे सरकार से वार्ता को तैयार हैं
-लेकिन पहले तीन नये कृषि कानूनों को निरस्त करने पर बातचीत होगी
-किसानों ने घोषणा की कि उनकी यूनियनों के प्रतिनिधि 14 दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठेंगे
किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू- रविवार को किसान राजस्थान के शाहजहांपुर से जयपुर-दिल्ली राजमार्ग के रास्ते सुबह 11 बजे अपने ट्रैक्टरों से ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू करेंगे
-किसान नेता पन्नू का आरोप-सरकार ने आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने ऐसा नहीं होने दिया। मैं कहना चाहता हूं कि जारी आंदोलन पूरी तरह 32 किसान संघों के नियंत्रण में है।
कृषि कानून को लेकर केन्द्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने कहा- गतिरोध खत्म करने के लिए आंदोलन के नेताओं केो साथ अगले दौर की बैठक शीघ्र बुलाने की कोशिश की जा रही है। प्रकाश ने कहा, हम चर्चा कर रहे हैं, तारीख अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा, ” हमें बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाना होगा। कोई और रास्ता नहीं है। किसान भी इस बारे में जानते हैं, हम भी जानते हैं।
बता दें, किसान हितों को देखते हुए सरकार ने सितंबर माह में नए कृषि कानून को पेश किया था। सरकार का कहना है कि इस कानून के बाद बिचौलिए खत्म हो जाएंगे और किसान को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा। इसके अलावा किसान अपने उत्पाद को देख में कहीं भी बेच सकेंगे। लेकिन किसानों को इस बात का डर है कि इस कानून के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था और मंडिया खत्म हो जाएंगी और मंडियां कारपोरेटरों की गिरफ्त में आ जाएंगी।