नेपालः भारत का विरोध और चीन की सरपरस्ती ओली को पड़ी भारी, पार्टी ने दिखाया बाहर का रास्ता, सदस्यता भी रद्द

नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया गया है साथ ही पार्टी ने केपी शर्मा ओली की सदस्यता भी रद्द कर दी है। ANI से बातचीत करते हुए स्प्लिन्टर समूह के प्रवक्ता, नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि केपी शर्मा ओली की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
दरअसल ओली के खिलाफ पार्टी में बगावत के सुर काफी पहले से बुलंद हो रहे थे। भारत विरोध बयान और चीन की सरपरस्ती ओढ़े ओली के शासन में भारत की सीमाओं पर सैन्य टकराव के कारण एनसीपी के सदस्य काफी नाराज थे। एनसीपी के पृथक धड़े के नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने शुक्रवार को यहां एक बड़ी सरकार विरोधी रैली का नेतृत्व किया था।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली द्वारा संसद को ‘‘अवैध तरीके’’ से भंग किए जाने से देश में मुश्किल से हासिल की गई संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य प्रणाली को गंभीर खतरा पैदा हुआ है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अपने धड़े के समर्थकों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि ओली ने न सिर्फ पार्टी के संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया, बल्कि नेपाल के संविधान की मर्यादा का भी उल्लंघन किया और लोकतांत्रिक रिपब्लिक प्रणाली के खिलाफ काम किया। उन्होंने कहा कि ओली के कदमों के चलते लोग प्रदर्शन करने को विवश हुए हैं और आज, पूरा देश प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ है।
नेपाल में 20 दिसंबर 2020 को तब राजनीतिक संकट में फंस गया जब चीन समर्थक समझे जाने वाले ओली ने प्रचंड के साथ सत्ता संघर्ष के बीच अचानक प्रतिनिधि सभा भंग करने की सिफारिश कर दी। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उनकी अनुशंसा पर उसी दिन प्रतिनिधि सभा को भंग कर 30 अप्रैल और 10 मई को नए चुनावों की तारीख का ऐलान भी कर दिया था।