न टार्चर किया न धमकी दी फिर भी हत्या की आशंका हर वक्त रहती थी…

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 3 अप्रैल को नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए। देश उनकी शहादत पर गमगीन है। इन्ही जवानों में से एक हैं राकेश्वर सिंह मनहास। ये मुठभेड़ के बाद लापता हो गए। मुठभेड़ के दो दिन के बाद नक्सलियों ने ह्वाट्सऐप मैसेज के जरिए बताया, लापता जवान उनके पास है, सुरक्षित है उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। आज नक्सलियों ने राकेश्वर सिंह मनहास को रिहा कर दिया। अपनी रिहाई के बाद राकेश्वर सिंह ने जो कुछ बताया आपसे शेयर कर रहा हूं…
राकेश्वर सिंह ने बताया, वह तीन अप्रैल का दिन था, मुठभेड़ के बाद मैं भटक गया था। चार तारीख को नक्सलियों ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें कई गावों में घुमाया गया।
आंखों पर हमेशा पट्टी बंधी रहती थी, हाथ बंधे रहते थे, मुझे किन-किन गांवों में ले जाया गया इसका मुझे पता नहीं। उन्होंने कहा, नक्सलियों ने हमारे साथ बुरा बर्ताव नहीं किया।
मुझे वक्त पर खाना मिलता था, पानी मिलता था। नक्सलियों में मुझे न तो मेरे साथ मार पीट की न ही किसी तरह की धमकी दी गई।
नक्सलियों ने इस दौरान कभी इस बात का दबाव नहीं डाला की मुझे नौकरी छोड़ देनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने न तो हमारी फोर्स या फिर पुलिस के बारे में किसी जानकारी के लिए दबाव डाला।
राकेश्वर सिंह ने बताया- अच्छा रहा, नक्सलियों ने छोड़ने का वादा किया था और उन्होंने मुझे आज छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने यह भी बताया सब कुछ ठीक होने के बावजूद हत्या की आशंका बराबर बनी रहती थी, बहरहाल आज मैं जिंदा हूं सही सलामत हूं।