नवरात्र 2021: पूरे नौ दिनों का होगा इस बार का नवरात्र, जानिए कैसे बनेगी विशेष फलदायक

शक्ति की उपासना का महापर्व वासंतिक नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार का वासंतिक नवरात्र पूरे नौ दिनों का होगा। इसी दिन नववर्ष की शुरुआत भी होगी। पंचांग के मुताबिक 13 अप्रैल को सूर्योदय 5: 43 मिनट पर और प्रतिपदा तिथि का मान सुबह 8:47 बजे तक, व इसके पश्चात द्वितीया तिथि लग रही है।
अश्विनी नक्षत्र दिन में एक बजकर दो मिनट तक ही है। मंगलवार के दिन अश्विनी नक्षत्र होने से ‘अमृत’ नामक औदायिक योग निर्मित हो रहा है। इससे यह दिन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी होगा। वासंतिक नवरात्र का समापन 21 अप्रैल को होगा।
कलश स्थापन मुहूर्त
13 अप्रैल को प्रतिपदा तिथि सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक ही है। अत: सूर्योदय 5 बजकर 43 मिनट से 8 बजकर 47 मिनट तक कलश स्थापन करें तो उत्तम रहेगा। लेकिन यदि इस समय न हो सके तो सूर्योदय से सूर्यास्त (सायंकाल 6 बजकर 17 मिनट) तक कलश स्थापन द्वितीया तिथि में भी किया जा सकता है।
इसके लिए अभिजित मुहूर्त और द्विस्वभाव लग्न को सर्वोत्तम माना जाता है। अभिजित मुहूर्त मध्याह्न में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक। द्विस्वभाव लग्न सुबह 9 बजकर 18 मिनट (मिथुन लग्न में) से 11 बजकर 31 मिनट तक, पुन: शाम 4 बजकर 4 मिनट (कन्या लग्न में) से शाम 6 बजकर 15 मिनट तक है। इनमें कभी भी कलश स्थापन किया जा सकता है।
19 को महानिशा पूजा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार 19 अप्रैल दिन सोमवार को सूर्योदय 5 बजकर 39 मिनट पर और सप्तमी तिथि सायंकाल 6 बजकर 46 मिनट तक पश्चात अष्टमी तिथि अर्धरात्रि को विद्यमान होने से महानिशा पूजा इसी दिन रात्रि में संपन्न होंगे। महाअष्टमी का व्रत 20 अप्रैल को रखा जाएगा।
वहीं महानवमी 21 अप्रैल को होगी। इस दिन भी सूर्योदय 5 बजकर 38 मिनट पर और नवमी तिथि का मान शाम 6 बजकर 59 मिनट तक है। इस वर्ष संपूर्ण दिन नवमी होने से यह दिन नवमी के व्रतार्चन और हवनादिक कार्य के पूर्ण ग्राह्य रहेगा।
(श्रोत- अमर उजाला)