लॉकडाउनः दूध लेने निकले 13 साल के बच्चे को पुलिस ने बेरहमी से पीटा, पैर टूटा तो भाग निकले

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते पूरी दुनिया लॉकडाउन मे है। भारत में भी लॉकडाउन है लेकिन कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बीते चार दिनों से दिल्ली से अपने गावों की तरफ जाने वाले लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर हैं। ये जानते हुए की कोरोना का संक्रमण कितना घातक परिणाम दे सकता है। लोगों के लॉकडाउन का पालन करने पर केन्द्र ने राज्यों को निर्देश जारी किया कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया जाए। केन्द्र के आदेश के साथी ही राज्यों ने अपने यहा प्रशासन को सख्ती से लॉकडाउन का पालन करने का फरमान जारी कर दिया है। लेकिन इस फरमान की आड़ में कुछ पुलिस वाले ऐसी अमानवीय हरकत कर रहे हैं जिसे जानकर हर कोई गुस्से से भर जा रहा है है। पुलिस का ऐसा की एक कारनामा फरीदाबाद से सामने आया है।
लाॉकडाउन की आड़ में पुलिस का सामने आया अमानवीय चेहरा
ये अच्छी बात है कि पुलिस जानलेवा कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए बेहद सक्रियता के साथ काम कर रही है लेकिन उसे लोगों के ऊपर हाथ उठाने का अधिकार किसने दिया है। उन्हें सख्ती बरतने को कहा गया है, उनसे किसी ने ये नहीं कहा कि किसी के ऊपर लाठियां बरसा दें। ओल्ड फरीदाबाद में घर से बाहर दूध लेने निकले एक 13 साल के बच्चे पर पुलिस ने इतना लाठियां बरसाईं कि उसका पैर टूट गया।
घर से दूध लेने घर से निकला था बच्चा
बच्चे का आरोप है कि वह अपने घर से दूध लेने निकला था। इतने में पुलिस वालों ने बिना कुछ पूछे उसे पीटने लगे। वह कहता रहा है कि वह घर से दूध लेने निकला है लेकिन पुलिस वालों ने उसकी एक न सुनी वह उसे पीटते रहे। वह कहता रहा उसका पैर टूट गया लेकिन ये पुलिसकर्मी नहीं पसीजे। पुलिस वालों को जब लगा कि लड़के का पैर वाकई टूट गया है तो वह चंपत हो गए।
प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, पुलिस वाले बिना कारण बच्चे की पिटाई की
इस घटना के बाद वहां पर भीड़ एकत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसके सामने पुलिस वाले ने बच्चे को बुरी तरह से पीटा। बच्चा कहता रहा कि वह दूध लेने निकला है लेकिन पुलिस वाले माने नहीं। लड़के ने पुलिस वालों से कहा कि उसके पास दूध के पैसे हैं, वह घर बात कर लें लेकिन पुलिसकर्मी नहीं माने, वे लगातार बच्चे पर डंडे बरसाते रहे।
नगर निगम के कर्मचारियों ने बच्चे को पुलिस के चंगुल से बचाया
यह तो शुक्र था कि मौके पर नगर निगम के कर्मचारी थे, उन्होंने पुलिसकर्मियों के चंगुल से बच्चे को बचाया वरना ये कुछ भी कर सकते थे। भीड़ को देखकर पुलिसकर्मी वहां से भाग गए। रास्ते से गुजर रहे एक लड़के दीपक ने परिजनों को फोन कर सूचना दी। जानकारी के अनुसार जिस पुलिसकर्मी ने ये अमानवलीय कार्य किया है उसने पहले भी एक रेहणी वाले को बुरी तरह से पीटा था।
मामले की लीपापोती में लगे अधिकारी
इस घटना के बाबात पुलिस के आला अधिकार जांच की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरोपी पुलिस कर्मी ने बताया है कि उसने जब बच्चे को बुलाया तो वह स्कूटी से भागने लगा, इसी दौरान स्कूटी गिर गई और उसका पैर टूट गया। लेकिन सवाल ये है कि जब बच्चा गिरा और उसका पैर टूट गया तो पुलिसकर्मियों के वहां से भागने की क्या जरुरत थी। क्या वह बच्चे को अस्पताल नहीं पहुंचा सकते थे। हालांकि पुलिस अधिकारी जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।