किसान आंदोलनः समाधान का आठवां प्रयास भी विफल, बोले किसान-मरेंगे या जीतेंगे

किसान-नेताओं-के-साथ-बातचीत-करने-के-लिए-केंद्रीय-मंत्री-नरेंद्र-सिंह-तोमर-और-पीयूष-गोयल
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन जारी है। एक माह से ज्यादा समय से जारी आंदोलन की समाप्ति को लेकर सरकार और 40 किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की बात-चीत भी बे-नतीजा खत्म हो गई। अब सरकार और किसान संगठन 15 जनवरी को एक बार फिर समस्या के समाधान को लेकर बैठक करेंगे।
नई दिल्ली स्थिति विज्ञान भवन में आयोजित इस बैठक में 40 किसान संगठनों के नेताओं के अलावा केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश मौजूद थे। इसके पहले 30 दिसंबर को हुई वार्ता में पराली जलाने और विद्यूत सब्सिडी को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बनी थी।
विज्ञान भवन में आयोजित आठवें दौर की बैठक के दौरान किसान हाथों में पर्ची लिए हुए थे जिस पर हम या तो मरेंगे या जीतेंगे। बैठक के दौरान किसानों ने सरकार के प्रतिनिधियों से साफ कर दिया कि आंदोलन तभी खत्म होगा जब कानून वापस लिया जाएगा। किसान नेता इस बात पर अड़े हैं कि कानून वापस लिया जाए। एक किसान नेता ने तो यहां तक कहा कि हमारी घर वापसी तभी होगी जब लॉ वापसी होगी।
किसान नेताओं ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खेती को राज्य सरगकार का मुद्दा बनाए जाने की घोषणा कर दी है, तो केन्द्र के कृषि मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। किसान नेता ने कहा, ऐसा लगता है कि सरकार मुद्दा सुलझाना नहीं चाहती है। इस दौरान किसानों ने सरकार से सीधा जवाब दिए जाने की मांग की। किसान नेता ने कहा, इन हालातों में आप साफ जवाब दें, हमारा और अपना वक्त बर्बाद न करें।
जानिए किसने क्या कहा…
तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी: राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता

सरकान ने हमें कहा कि कोर्ट में चलो। हम ये नहीं कह रहे कि ये नए कृषि क़ानून गैर-क़ानूनी है। हम इसके खिलाफ हैं। इन्हें सरकार वापिस ले। हम कोर्ट में नहीं जाएंगे। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे: महासचिव, अखिल भारतीय किसान सभा

15 जनवरी को सरकार द्वारा फिर से बैठक बुलाई गई है। सरकार क़ानूनों में संशोधन की बात कर रही है, परन्तु हम क़ानून वापिस लेने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे : किसान नेता

आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से कहा गया कि क़ानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, परन्तु कोई विकल्प नहीं मिला, किसान यूनियन और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है। मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा : केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर