किसान आंदोलनः SC ने कहा- आप कृषि कानूनों पर रोक लगाएंगे या हम लगाएं, सिंधु बार्डर पर भड़क सकता है दंगा

नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर 47 दिनों से अड़े किसान आर-पार की मूड में हैं। सरकार और किसान संगठनों के मध्य आठ दौर की वार्ता बे नतीजा समाप्त होने के बाद 15 जनवरी को एक बार फिर सरकार और किसान नेता आमने सामने होंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को उम्मीद है कि 15 जनवरी की वार्ता में कुछ अच्छे परिणाम सामने आएंगे। इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कुछ लोग समाधान के रास्ते में रोड़ा अटका रहे हैं उन्हें समिति से बाहर किया जाएगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर बड़ी बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सरकार से कहा है कि जिस तरह से प्रक्रिया आगे बढ़ रही है उससे हमे निराशा है। उन्होंने कहा हमे नहीं पता कि सरकार और किसान संगठनों के मध्य क्या वार्ता हो रही है। मुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में सरकार से कहा आप कृषि कानूनों पर रोक लगाएंगे या फिर हम कदम उठाएं?
बता दें इससे पहले आठ दौर की वार्ता बे नतीजा खत्म हो चुकी है। किसान नए कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़ें हैं तो सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि वह नए कृषि कानून को वापस नहीं लेगी। 15 जनवरी को नौवें दौर की वार्ता होनी है। इधर किसान नेताओं ने भी सरकार से साफ कर दिया है कि मरेंगे या फिर जीतेंगें, जबतक कृषि कानून वापस नहीं होता घर वापसी नहीं होगी। कृषि कानून वापस होने तक तक लड़ेंगे।
आइए जानते हैं किसान आंदोलन और नए कृषि कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा…
-चीफ जस्टिस एसए बोबडे- जिस तरह से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे खुश नहीं हैं
-हमें नहीं पता कि आपने कानून पास करने से पहले क्या किया, वार्ता में क्या हो रहा है?
-हम किसान मामले के एक्सपर्ट नहीं हैं, क्या आप इन कानूनों को रोकेंगे या हम कदम उठाएं
-हालात बदतर होते जा रहे हैं, लोग ठंड से मर रहे हैं, वहां खाने, पानी का कौन ख्याल रख रहा है?’
-हम किसी का खून अपने हाथ पर नहीं लेना चाहते हैं, हम किसी को भी प्रदर्शन करने से मना नहीं कर सकते हैं
-हम ये आलोचना अपने सिर नहीं ले सकते हैं कि हम किसी के पक्ष में हैं और दूसरे के विरोध में
-सीजेआई-सरकार की ये दलील नहीं चलेगी कि इसे किसी और सरकार ने शुरू किया था
-सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि 41 किसान संगठन कानून वापसी की मांग कर रहे हैं
-वह आंदोलन जारी करने को कह रहे हैं
-चीफ जस्टिस ने कहा कि आप हल नहीं निकाल पा रहे हैं, लोग मर रहे हैं, आत्महत्या कर रहे हैं
-हम नहीं जानते क्यों महिलाओं और वृद्धों को भी बैठा रखा है, हम कमिटी बनाने जा रहे हैं
-चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कानून वापसी की बात नहीं कर रहे हैं
-हम ये पूछ रहे हैं कि आप इसे कैसे संभाल रहे हैं
-हम ये नहीं सुनना चाहते हैं कि ये मामला कोर्ट में ही हल हो या नहीं हो
-हम बस यही चाहते हैं कि क्या आप इस मामले को बातचीत से सुलझा सकते हैं
-अगर आप चाहते तो कह सकते थे कि मुद्दा सुलझने तक इस कानून को लागू नहीं करेंगे
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमें आशंका है कि किसी दिन वहां (सिंघु बॉर्डर) हिंसा भड़क सकती है
इसके बाद साल्वे ने कहा कि कम से कम आश्वासन मिलना चाहिए कि आंदोलन स्थगित होगा। सब कमिटी के सामने जाएंगे। CJI ने कहा कि यही हम चाहते हैं, लेकिन सब कुछ एक ही आदेश से नहीं हो सकता। हम ऐसा नहीं कहेंगे कि कोई आंदोलन न करे। यह कह सकते हैं कि उस जगह पर न करें।
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता- बड़ी संख्या में किसान संगठन कानून को फायदेमंद मानते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे सामने अब तक कोई नहीं आया है जो ऐसा कहे। इसलिए, हम इस पर नहीं जाना चाहते हैं। अगर एक बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि कानून फायदेमंद है तो कमिटी को बताएं। आप बताइए कि कानून पर रोक लगाएंगे या नहीं। नहीं तो हम लगा देंगे।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कानून से पहले एक्सपर्ट कमिटी बनी। कई लोगों से चर्चा की। पहले की सरकारें भी इस दिशा में कोशिश कर रही हैं। इसके बाद सीजेआई ने कहा कि यह दलील काम नहीं आएगी कि पहले की सरकार ने इसे शुरू किया था। आपने कोर्ट को बहुत अजीब स्थिति में डाल दिया है। लोग कह रहे हैं कि कोर्ट को क्या सुनना चाहिए, क्या नहीं, हम अपना इरादा साफ कर देना चाहते हैं।