छत्तीसगढ़ नक्सली हमले में कांकेर का लाल शहीद, कांकेर ने 10 दिन में दी तीसरी शहादत

छत्तीसगढ़ के बीजापुर के तर्रेम के बीहड़ों में शनिवार को नक्सली हमले में 22 जांबाज शहीद हो गए। एक बार फिर मांग उठने लगी है जवानों की इस शहादत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। लेकिन नक्सलियों अंत तक जूझने वाले कांकेर जिले के जवान रमेश जुर्री भी इस शहादत का हिस्सा बने। कांकेर अब इस नाम से भी जाना जाएगा कि यहां का जवान देश के लिए हर वक्त तैयार है।
ऐसा इसलिए की 10 दिनों के भीतर कांकेर का तीसरा लाल देश के लिए अपने जान आहूति दी है। बीजापुर नक्सल हमले में शहीद रमेश जुर्री चारामा के पंडरीपानी के रहने वाले थे।
रमेश जुर्री के शहीद होने की खबर मिलते ही पूरे कांकेर गांव को सदमा लगा है। हर आंखे अपने लाल के शहीद होने पर गमज़दा है तो सीना गर्व से तना भी है। शहीद की मां इस गम के बेफिक्र हैं कि अब उनका बेटा इस जहां में नहीं रहा। शहीद रमेश का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर तक उनके गांव लाया जाएगा।
शहीद रमेश जुर्री का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद रमेश जुर्री अपनी पत्नी और चार साल की बेटी के साथ बीजापुर में ही रहते थे। 3 दिन पहले ही उनकी मां बीजापुर से अपने बेटे से मिलकर गांव लौटी थीं।
रमेश तीन दिन पहले की अपनी मां से मिला था। इसके बाद वह अपने साथी जवानों के साथ गस्त पर निकल गए थे और इसी बीच नक्सलियों के हमले में शहीद हो गए। रमेश 2010 से बीजापुर डीआरजी में पदस्थ थे। 2 माह पहले ही रमेश का आरक्षक से प्रधान आरक्षक पर प्रमोशन हुआ था। रमेश की शादी 2015 में हुई थी और उनकी एक चार साल की मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया है।