मैं संसद हूं, मै आहत हूं, क्या यही मेरी नियति है…

राज्यसभा में माननीयों की करतूत से देश शर्मसार, कौन है जिम्मेदार

संसद मे हंगामा करते सांसद
मै संसद हूं, देश में होने वाली हर हरकत की चश्मदीद, यहीं से देश के विकास की पटकथा लिखी जाती है और यहीं से देश की दशा और दिशा तय होती है। यह वह स्थान है जहां पर हमारे प्रतिनिधियों के चरित्र को भी परखा जाता है। यही वह जगह है जिसने आजादी के बाद के नेताओं के चरित्र को देखा है और अब वर्तमान के नेताओं के चरित्र से भी दो चार हो रहा है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का दर्जा हासिल करने वाले संसद ने वह दिन भी देखा है जब देश का गौरव बढ़ाने वाले संवाद हुआ करते थे और आज वह दिन भी देख रहा है जब इसकी मर्यादा को तार-तार करने में देश के माननीय कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हमारे माननीयों की ओछी हरकतों ने देश के लोकतंत्र को पैरों तले कुचला उसकी अस्मिता को रौंदा है। क्या यही मेरी नियति है…
मर्यादा को तार-तार किया गया
हालांकि संसद ने कई बार नेताओं की ओछी हरकतों का चश्मदीद रहा है लेकिन 11 अगस्त को हमारी मर्यादा को जिस तरह से रौंदा गया उससे मेरी आत्मा आहत है। हर कोई एक दूसरे पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगा रहा है लेकिन सच्चाई क्या है, किस पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया जाए। सत्ता पक्ष पर या विपक्ष पर। दरअसल दोनों ही तरफ से ऐसी हरकत की गई जिसने हमारी आत्मा को आहत किया है।
उदंड स्वभाव के लोग संसद में पहुंच रहे हैं
सवाल यह भी है कि संसद में अपनी बात कहने की मर्यादा का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। क्या विपक्ष सत्ता की लालसा में संसद की आत्मा को कुचलने का प्रयास कर रहा है या फिर सत्ता पक्ष को सत्ताच्युत होने का डर सता रहा है। जिस तरह से संसद में नेता अपनी बात कह रहे हैं उससे उनके असली चरित्र का आकलन आसानी के किया जा सकता है। लगता ही नहीं कि वे जनता के सेवक हैं ऐसा लगता है जैसे कोई उदंड स्वभाव के लोग संसद में पहुंच गए हैं और संसद की आत्मा को आहत करने को बेताब हैं।
सरकार भी है जिम्मेदार
दरअसल राज्यसभा में हुआ क्या था, क्यों विपक्ष इतना आक्रमक हो गया था जिसने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने में भी संकोच नहीं किया। विपक्ष आखिर क्या चाहता है। संसद में विपक्ष की अगुआ कांग्रेस चाहता था कि पेगासस जासूसी कांड पर चर्चा की जाए। इसके अलावा किसान आंदोलन को लेकर चर्चा करने पर विपक्ष अड़ा था। हालांकि सरकार की तरफ के कहा गया है कि वह किसान आंदोलन को लेकर चर्चा करने को तैयार है लेकिन पेगासस पर किसी तरह की चर्चा को लेकर इनकार किया था।
महिला मार्शल को घसीट कर पीटा गया
इसके अलावा इंश्योरेंस बिल को लेकर भी विपक्ष चर्चा चाहता था जिसके लिए सरकार तैयार थी। लेकिन विपक्ष के गतिरोध के कारण चर्चा नहीं हो पाई। विपक्षी सांसदों द्वारा मानसून सत्र की शुरुआत से हंगामा जारी था। सत्र का समापन आते-आते ये हंगामा गंभीर हो गया। इसमें न केवल पुरुष सांसद बल्कि महिला सांसदों ने हंगामा करने में पीछे नहीं रहीं। संसद की सुरक्षा मे तैनात मार्शलों को मारा गया, महिला मार्शल को घसीट कर पीटा गया। विपक्ष की इस हरकत पर संसद के दोनों सदनों के सभापति ने कड़ी आपत्ति जताई है।
संसद की तस्वीर ऐसी भी है…
संसद की सुरक्षा में लगे मार्शलों ने भी विपक्षी नेताओं की इस हरकत पर गहरी नाराजगी जताई है। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात दो सुरक्षा सहायकों ने राज्यसभा सचिवालय में संसद की सुरक्षा सेवा के निदेशक को पत्र लिख कर विपक्षी सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरक्षा सहायकों ने बताया, सांसदों का व्यवहार बेहद आक्रामक था। अक्षिता भट ने कहा, कुछ पुरुष सांसद जो प्रदर्शन में शामिल थे, मेरी तरफ आक्रामक अंदाज में दौड़े और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की।
मेरी गर्दन पकड़ी गई जिससे मैं घुटन महसूस करने लगा
अक्षिता भट ने बताया, जब मैने इसका विरोध किया तो सांसद छाया वर्मा और फूलो देवी नेताम ने जबरदस्ती मेरी बांहें पकड़ी लीं और मुझे घसीटा इस दौरान मेरे साथ मारपीट की गई। एक अन्य सुरक्षा अधिकारी राकेश नेगी ने बताया, ड्यूटी के दौरान जब मै सांसदों को वेल में आने से रोक रहा था तब सांसद एलमारन करीम और अनिल देसाई ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। सांसद एलमारन करीन ने मेरी गर्दन पकड़ी ली और मुझे सुरक्षा घेरे से दूर करने का प्रयास करने लगे। उनकी इस हरकत से मुझे कुछ पल घुटन होने लगी। बता दें, एलामारन करीम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) से सांसद हैं। वहीं, अनिल देसाई शिवसेना और छाया वर्मा व फूलन देवी नेतम कांग्रेस पार्टी से सांसद हैं।
सभापति ने कहा सख्त कार्रवाई होगी
इस घटना के बाद राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक बैठक की। इस बैठक में दोनों ने सदन में सांसदों के ऐसे व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई गई। उन्होंने कहा, इस तरह की घटनाओं को भविष्य में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, साथ ही उन्होंने कहा, सदन की मर्यादा को तार-तार करने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की इस हरकत को लेकर सरकार की तरफ से प्रेस कांफ्रेसं आयोजित कर घटना पर कड़ी आपत्त जताई गई। सरकार ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया। इस प्रेस कांफ्रेंस में संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल, मुख्तार अब्बास नकवी, धर्मेन्द्र प्रधान, अर्जुन मेधावल और वी मुरलीधरन ने हिस्सेदारी की।
संसद के मानसून सत्र के दौरान सांसदों द्वारा किए गए शर्मनाक हरकत के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। दोनों एक दूसरे पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। आइए जानते हैं सरकार ने विपक्ष की इस हरकत को किस तरह से बयां किया है।
विपक्ष के हिंसक व्यवहार ने लोकतंत्र की हत्या की
भाजपा ने विपक्ष की हरकत पर सख्त लहजे में आपत्ति दर्ज कराई है। प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा नेताओं ने कहा, सत्र के दौरान विपक्ष के अलोकतांत्रिक और हिंसक व्यवहार ने भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय की कहानी लिखी है। उन्होंने कहा, सरकार ने कई मौकों पर विपक्ष को चर्चा का प्रस्ताव भेजा लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया। विपक्ष पर आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं ने कहा, विपक्ष को चर्चा से कोई मतलब नहीं, उन्होंने तय कर रखा था कि संसद को किसी तरह से बाधित रखा जाए।
विपक्ष को इस व्यवहार कि लिए माफी मांगनी चाहिए
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के व्यवहार के लिए माफी की मांग करते हुए कहा, भारत के संसदीय इतिहास के लिए शर्मनाक है और देश से इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। विपक्ष पर सख्त कार्रवाई की माग करते हुए उन्होंने कहा, इस व्यवहार के लिए विपक्ष के उपद्रवी नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, पूरे देश ने संसद ने विपक्ष का ड्रामा देखा, विपक्ष ये नहीं पचा पा रहा है कि देश उनसे हार मान चुका है। उनकी माई वे या हाईवे वाली सोच की निंदा करते हैं। देश भी इस तरह की सोच की निंदा करता है।
राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए भाजपा नेताओं ने कहा, राहुल गांधी कहते हैं ये देश में लोकतंत्र की हत्या है। राष्ट्र देख रहा है कि उन्होंने संसद में क्या किया। अगर उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास है तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। सभापति को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। विपक्ष ने आम जनता और टैक्स देने वालों की फिक्र नहीं है। घड़ियाली आंसू बहाने की जगह विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।
हंगामा करना विपक्ष का तय प्रोग्राम था
संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी- हमने विपक्ष से सहयोग की मांग की थी। बिल पास कराने के लिए भी साथ मांगा था, हम चाहते थे संसद सोमवार तक चले। लोकतंत्र की हत्या की बात करने वाले राहुल को देश से माफी मांगनी चाहिए। टेबल पर चढ़कर सांसदों ने उपद्रव किया। महिला मार्शलों को घसीटा गया। विपक्ष का तय प्रोग्राम था हंगामा करना।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल- विपक्ष ने सदन की गरिमा को गिराया।। मंत्री के हाथ से जवाब छीन लिया गया। वेल में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। मार्शल से धक्का मुक्की की गई। शीशा तोड़ा गया जो महिला मार्शल को लगा। रूल बुक चेयर की तरफ फेंक दी गई। ये हमला था। विपक्ष निराधार आरोप लगा रहा है,मुद्दे से भटका रहा।
सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर- मानसून सत्र के दौरान सड़क से संसद तक अराजकता फैलाना ही विपक्ष का एजेंडा था। संसद में विपक्ष का अराजक रवैया जारी रहा। विपक्ष को लोगों की, टैक्स भरने वालों की फिक्र नहीं है। जो भी हुआ, वो निंदनीय है। घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय विपक्ष को पूरे देश में माफी मांगनी चाहिए।
विपक्ष का सरकार पर आरोप
विपक्ष ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पेगासस जासूसी कांड, किसान आंदोलन और इश्योरेंस को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब चाहता था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं की आखिर सरकार देश की जनता को सच क्यों नहीं बताना चाहती है। आइए जानते हैं कि विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी- हमने पेगासस का मुद्दा उठाया। हमे संसद मे बोलने नहीं दिया गया। राज्यसभा में पहली बार सांसदों को पीटा गया। राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल- अपने संसदीय जीवन में इस तरह की शर्मनाक घटना कभी नहीं देखी। सपा नेता विशंभर निषाद- हमारी महिला सांसदों से धक्का-मुक्की की गई। राजद नेता मनोज झा- इंश्योरेंस बिल संसद ने नहीं पास किया, मार्शल लॉ ने पास किया है। DMK- संसद की ऐसी तस्वीर कभी नहीं देखी। हमारी महिला सांसदों को घसीटा गया।