विदेशी मदद के अभाव में अफगानिस्तान को कैसे चलाएगा तालिबान ?

अफगानिस्तान की सरकार में अहम किरदार निभा सकता है पाकिस्तान

20 सालों तक अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों को विराम देने के बाद आखिरकार अमेरिकी सेना पूरी तरह से लौट चुकी है। अमेरिकी सेना के लौटने पर तालिबानियों ने जश्न मनाया, तालिबान प्रवक्ताओं ने इसे अफगानियों की जीत बताया और बधाई दी। अमेरिका के वापस लौटने के साथ ही अफगानिस्तान के सामने बड़ा संकट भी मंडराने लगा है। ये संकट है उनकी सरकार के लिए जिन्हें विदेशी मदद मिलनी बंद हो गई है। कर्मचारियों और अफगान जनता को बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण कराने के लिए उन्हें आगे इस संकट से जूझना होगा।
तालिबानी सरकार में पाकिस्तान निभा सकता है अहम किरदार
तालिबान जल्द की नई सरकार की घोषणा कर सकता है। फिलहाल अंतरिम सरकार बनाने पर सारा जोर दिया जा रहा है। अफगानिस्तान में सरकार के गठन को लेकर पाकिस्तान जोर आजमाइश कर रहा है माना जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार के गठन में महत्वपूर्ण किरदार निभा सकता है। पाकिस्तान के हालिया बयान इस बात की तरफ संकेत कर रहे हैं कि वह अब खुलकर तालिबान के समर्थन में आ चुका है।
मोईद युसूफ ने पश्चिमी देशों को दी चेतावनी
सोमवार को पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने संडे टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा, अगर अफगानिस्तान की नई सरकार को मान्यता नहीं दी जाती है तो पश्चिमी देश 9/11 जैसा हमला एक बार फिर झेल सकता है। यूसुफ द्वारा पश्चिमी देशों को एक प्रकार से चेतावनी दी गई है कि वह अफगानिस्तान की नई सरकार को मान्यता प्रदान करें अन्यथा इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कही ये बात
उधर अफगानिस्तान के प्रवक्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर जहां अमेरिकी सैनिकों की वापसी को अफगानियों की जीत बताया है तो साथ ही उसने यह भी कहा कि वह अमेरिका व अन्य देशों से बेहतर रिश्ते बनाना चाहता है। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि भविष्य के लिए पूरी दुनिया हमारी मदद करे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, अफगानिस्तान में विमर्श के बाद ही सरकार का गठन किया जाएगा।
अफगानिस्तान की नई सरकार पर दुनिया की निगाहें
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान की नई सरकार पर विश्व की निगाहें जमी हैं। पूरी तरह से टूट चुके अफगानिस्तान को तालिबानी सरकार कैसे चलाएगी जबकि विदेशों की मिलने वाली मदद फिलहाल पूरी तरह से ठप है। वैसे भी अभी तक के हालात बता रहे हैं कि तालिबानियों की कथनी और करनी में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है ऐसे में अफगानिस्तान छोड़ने वालों के साथ तालिबान संयम बरतेंगे या फिर उन्हें बंधक की तरह जीवन गुजारना होगा।