कितने सही हैं भारत में कोरोना संक्रमण के आंकड़े, जानिए क्या है हकीकत…

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कोरोना वायरस से पूरा देश कराह रहा है। तीन लाख से ज्यादा लोग दुनिया में संक्रमित हैं और 14 हजार से ज्यादा लोगों की मौत संक्रमण के कारण हो चुकी है। चीन के वुहान से निकला यह वायरस अब पूरी दुनिया को निगलने को बेसब्र है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अभी तक इसे रोक पाने का कोई इलाज सामने नहीं आ पाया है। इस वायरस का सबसे बड़ा निशाना इटली है। यहां पांच हजार के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। अब हालात यह है कि सरकार समझ नहीं पा रही है कि किसे बचाया जाए या किसे मरने के लिए छोड़ दिया जाए। भारत समते विश्व के 35 से ज्यादा देश लॉकडाउन के कगार पर हैं। इस बीच भारत में कोरोना वायरस के सामने आ रहे आंकड़े सवालों के घेरे में आ रहे हैं। बड़ा सवाल है भारत में कोरोना संक्रमण के सामने आ रहे आंकड़े कितने सही हैं?
कितनी सही है भारत में कोरोना पीड़ितों की संख्या
बता दें पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से तीन लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं और 14 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत भी कोरोना संक्रमण से अछूता नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि भारत में कोरोना संक्रमण के आंकड़े इतने कम कैसे हैं। दूसरा बड़ा सवाल जहां से कोरोना वायरस फैला और जहां सबसे ज्यादा संख्या में मौतें हुईं वहां से आने वाले भारतीयों की जांच में क्या मापदंड अपनाया गया। पूरी दुनिया से भारतीयों को वापस अपने देश लाया गया लेकिन संक्रमण के मामले फिर भी बहुत कम हैं। ऐसा कैसे है…
टेस्ट केन्द्रों की संख्या बेहद कम इसलिए आंकड़े सटीक नहीं
सवाल इस बात का भी है कि भारत में कोरोना के मामले कम तो हैं लेकिन अब संक्रमण के मामले तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं? आखिर वजह क्या है। कहीं जो आंकड़े सामने आ रहे हैं दरअसल संक्रमण की संख्या उनसे कहीं ज्यादा तो नहीं जिनकी जांच ही नहीं हो पाई है। दरअसल इसकी असली वजह ये है कि भारत में कोरोना वायरस की जांच जितनी चाहिए उतनी हो नहीं पा रही है। इसके कारण सटीक आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं। बतादें भारत में कोरोना जांच के महज 118 टेस्ट केन्द्र हैं। फिलहाल अब प्राइवेट लैब में भी जांच के निर्देश दिए गए हैं लेकिन यहां जांच कराना सबके वश की बात नहीं है।
भारत में मात्र 17 हजार जांचे
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि भारत में अभी तक मात्र 17 हजार के करीब जांचे हुई हैं और कोरोना के 423 मामले सामने आए हैं। वहीं अमेरिका की बात करें तो यहां 1,41,591 लोगों के कोरोना वायरस की जांच की गई और 26,905 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।
कोरोना संक्रमित देशों में जांचों का आंकड़ा
इसी तरह से इटली में 2,16664 लोगों की जांचें की गईं और 53,578 पॉजिटव मामले सामने आए थे। वहीं दक्षिण कोरिया में 3,16,664 लोगों की जांच कराई गई और 80897 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं और फ्रांस में 36 हजार 747 लोगों की जांचें हुई हैं और 14 हजार 459 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इसी तरह जब जर्मनी में एक लाख 67 हजार लोगों के कोरोना की जांच की गई, तो 23 हजार 129 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जब ब्रिटेन में 64 हजार 621 लोगों के कोरोना की जांच की गई, तो 5 हजार 18 लोग पॉजिटिव पाए गए।
कोरोना जांच में भारत पिछड़ रहा, लोग जांच से बच रहे हैं
इन आकड़ों से एक बात तो साफ हो गई है कि भारत में कोरोना वायरस की जांच की संख्या बढ़ने के साथ कोरोना संक्रमित लोगों का आंकड़ा बढ़ सकता है। इसके पीछे एक और कारण काम कर रहा है। लोग अपनी जांच कराने को आगे नहीं आ रहे हैं। या तो वे लोग अपनी बीमारी छिपा रहे हैं या फिर किसी डर की वजह से सामने नहीं आना चाहते हैं। एक बात तो साफ है जैसे-जैसे कोरोना वायरस की जांच आगे बढ़ रही है कोरोना संक्रमित पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अगर कोरोना के प्रहार का कम करना है तो भारत सरकार को टेस्ट लैबों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। अगर समय रहते ऐसा नहीं होता है तो स्थिति बेहद विस्फोटक हो सकती है।
भारत के पास मात्र छह दिन का समय बचा है
वैसे भी वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत के पास कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मात्र छह दिन बचे हैं। इन छह दिनों में अगर भारत ने कोरोना के संक्रमण को रोकने में सफलता पा ली तो उसे राहत मिल सकती है वरना भारत में भी इटली जैसे भयावह हालातों से गुजरना पड़ सकता है। इसे देखते हुए भारत सरकार का लॉकडाउन का फैसला सही है। लेकिन WHO की रिपोर्ट बताती है कि केवल लॉकडाउन ही एक मात्र उपाय के तौर पर नहीं देखा जा सकता है इसके लिए कई एहतियाती कदम उठाने होंगे। सरकार को अपने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को चाक चौबंद करना होगा।
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