हेल्थ रिपोर्टः भारत के 11.6 करोड़ बुजुर्गों में से 7.5 करोड़ गंभीर बीमारियों से पीड़ित

भारत युवाओं का देश कहा जाता है। आंकड़ों में भारत में युवाओं की संख्या 25 करोड़ बताई गई है। हालांकि भारत में बुजुर्गों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि 2050 तक बुजुर्गों की संख्या 31 करोड़ के पार हो जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक 2011 में हुई जनगणना के आधार पर कहा जा सकता है कि 2050 तक देश में बुजुर्गों कीसंख्या 31 करोड़ के ऊपर पहुंच जाएगी। यह रफ्तार हर साल 3 फीसदी की दर से बढ़ रही है। बता दें वर्तमान में भारत में बुजुर्गों की संख्या 11.6 करोड़ है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि भारत रहने वाले 7.5 करोड़ बुजुर्ग किसी न किसी गंभीर बीमारी जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की अगुवाई में ये आंकड़ा लॉन्गिट्यूडनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (LASI) की रिपोर्ट में सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किया गया यह अबतक का सबसे बड़ा सर्वे है।
सर्वे में कई चिंताजनक परिणाम सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश की करीब 27 प्रतिशत बुजुर्ग एक से ज्यादा जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे है। करीब 40 प्रतिशत बुजुर्ग किसी-न-किसी रूप से अपंग हैं, 20 प्रतिशत बुजुर्ग मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि ये सर्वे बुजुर्गों के लिए बनने वाली केंद्र और राज्यों की सरकारी योजनाओं की प्राथमिकता तय करने सहायक सिद्ध होंगी।
सर्वे रिपोर्ट को लेकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, 2011 की जनगणना में देश की कुल आबादी के 8.6 प्रतिशत 60 वर्ष से ज्यादा की उम्र के बुजुर्ग थे। इनकी कुल आबादी 10.30 करोड़ थी। अगर 3% की सालाना वृद्धि मान ली जाए तो 2050 तक भारत में 31.90 करोड़ बुजुर्ग जनसंख्या होने का अनुमान है।
इस सर्वे के पहले भाग 45 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के 72,250 लोगों के नमूने एकत्र किए गए। इनमें पति-पत्नी दोनों शामिल हैं। इन 72,250 में 31,464 लोगों की उम्र 60 वर्ष या इससे ऊपर है जबकि 6,749 लोग 75 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के हैं। सर्वे में सिक्किम को छोड़कर सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल किए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धनः यह भारत का पहला और दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा लॉन्गिट्यूडनल डेटाबेस है जो बुजुर्गों के लिए सरकारी नीतियां और कार्यक्रमों के निर्माण में सहायक साबित होगा। इससे बुजुर्गों की सामाजिक, शारीरिक, मानसिक और आर्थिक सेहत का ख्याल रखने के लिए योजनाओं की दिशा तय करने में मददगार होगा।”
गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए सर्वे के दौरान बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच की गई। इससे बुजुर्गों में हाइपरटेंशन, आखों की रोशनी घटने (दृष्टि क्षीणता), ज्यादा वजन (ओवरवेट) या मोटोपा, कुपोषण और सांस संबंधी गंभीर बीमारियां सामने आई हैं। गंभीर बीमारियों से ग्रसित 60 वर्ष और इससे ज्यादा उम्र के करीब दो-तिहाई बुजुर्गों के अलग-अलग रोगों का इलाज किया गया।
इनमें 77% हाइपरटेंशन, 74% दिल से संबंधी गंभीर बीमारियों, 83% मधुमेह (डाइबिटीज), 72% फेफड़े संबंधी गंभीर बीमारियां और 75% कैंसर की बीमारियों के मरीज थे। वहीं, आधा से ज्यादा 58% बजुर्गों के स्ट्रोक की बीमारी का इलाज हुआ जबकि 56% हड्डियों या जोड़ों संबंधी और 41% के मानसिक बीमारियों का इलाज किया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कराए गए इस सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ कि, गंभीर रोगों से जूझ रहे बुजुर्ग शहरों में ज्यादा सुरक्षित हैं जबकि गांवों तक इनके इलाज पहुंच ही नहीं पा रहा है। इसके अलावा छोटे राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में बुजुर्गों के प्रति ज्यादा संवेदनाएं बरती जा रही हैं और उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था अन्य जगहों की अपेक्षा बेहतर हैं। वहीं दूसरी तरफ देश के उत्तर, पूर्व और मध्य क्षेत्र के राज्यों में सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं बुजुर्गों तक पहुंच ही नहीं पा रही हैं।