गुलाम नबी आजाद ने कहा- किसी युवा मुस्लिम नेता का भारत का प्रधानमंत्री बनना बेहद कठिन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष की अहम भूमिका निभाते हुए गुलाम नबी आजाद का बीते दिनों कार्यकाल समाप्त हुआ। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने राजनीतिक जीवन के तमाम उतार-चढावों का जिक्र किया। इस दौरान वह भावुक भी हुए लेकिन उन्होंने इस दौरान एक अहम बात कही।उन्होंने कहा, मै उन खुदकिश्मत मुसलमानों में हूं जिनका जन्म हिंदुस्तान में हुआ। उन्होंने कहा भारत के मुसलमान दुनिया के सबसे भले इंसानों में हैं।
इसके अलावा उन्होंने तमाम मुस्लिम देशों का जिक्र करते हुए कहा, उन देशों में दूसरा कोई न तो हिंदू है, न सिख है न ईसाई लेकिन उन देशों में आए दिन हिसां होती है। एक तरह के कह सकते हैं ये आपस मे ही लड़कर खत्म हो रहे हैं। लेकिन हिंदुस्तान के मुसलमान ऐसे नहीं हैं। एक बार फिर गुलाम नबी आजाद ने दिल की बात कही है।
एक साक्षात्कार के दौरान गुलाम नबी आजाद ने कहा, युवा मुस्लिम नेता के लिए भारत का प्रधानमंत्री बनने की चाह रखना बहुत मुश्किल है। उन्होंने ये बातें हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार के दौरान कही।
इससे पहले गुलाम नबी आजाद ने कहा था, देश में उन हिंदू प्रत्याशियों की संख्या कम हो गई है जो उन्हें प्रचार के लिए अपने यहां बुलाते हैं। 2018 में एमयू में उन्होंने जो बाते कहीं उससे जुड़े सवालों पर गुलाम नबी आजाद ने कहा, देश का माहौल बिगड़ गया है।
गुलाम नबी आजाद ने कहा, लोग डरे हुए हैं, देश में माहौल इतना बिगड़ गया है कि इतिहास के उलट जहां 99 फीसदी हिंदू उम्मीदवार मुस्लिम वोट पाने के लिए उन्हें उनके प्रचार के लिए आमंत्रित करते थे, वहीं अब यह संख्या 40 फीसदी तक कम हो गई है।
आजाद ने कहा उनका संदेश एमयू के पूर्व छात्रों को भी था जो राजदूत बनना और उस भारत को वापस लाना उनका काम है। उन्होंने कहा यह वह भारत है जब 1979 में महाराष्ट्र में 95 फीसदी हिंदू मतदाताओं वाले वोट बैंक में चुनाव लड़ा और जीता।