गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को उनकी औकात पर लाने वाले कैप्टन को मिला सम्मान

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीनी सैनिकों के हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए। भारतीय जवानों ने भी जवाबी हमला बोलते हुए चीन के 45 से ज्यादा सैनिकों को हलाक कर दिया था। हालांकि चीन ने कभी सही संख्या को बताया नहीं, लेकिन माना कि उसके भी सैनिक मारे गए थे।
इसके बाद एलएसी पर चीन की नापाक हरकतों को नाकाम करने और चीनी सैनिकों के होश ठिकाने लगाने में अहम किरदार निभाया था 16 बिहार रेजिमेंट के कैप्टन सोइबा मनिंगवा रंगनामेई ने। उनके हैरतअंगेज काम के लिए मणिपुर से सीएम एन,बीरेन सिंह ने सम्मानित किया। बता दें,चीन के साथ हुई इस हिंसक झड़प में इसी रेजिमेंट के अधिकांश जवान शामिल थे, जिनकी अगुआई कैप्टन सोइबा कर रहे थे।
भले ही चीन अपने सैनिकों के हताहतों की संख्या को छिपाता रहा हो लेकिन रूस की न्यूज एजेंसी तास की माने तो बीते साल 15 जून 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प में चीन के 45 सैनिक मारे गए थे। यही बातें अमेरिका की खूफिया एजेंसी ने बताया था। अभी हाल ही में चीन के कुछ पत्रकारों के इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया था उसने चीनी सरकार की इस गलत सूचना को लेकर आवाज उठाई थी।
पत्रकारों की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया था इस झड़प में चीन के 45 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। ये गिरफ्तारी उस वक्त की गई जब चीन ने गलवान घाटी में हुई घटना में मारे गए चार जवानों को सम्मानित कर रहा था। पत्रकारों ने चीनी सरकार के फैसले का विरोध किया था।
इस घटना के बाद दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर गतिरोध कम करने को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं। हालांकि हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने सीमा पर घातक हथियारों का जमावड़ा कर लिया था। एक बार तो स्थिति युद्ध तक आ पहुंची थी। लेकिन भारतीय सैनिकों के आक्रामक रुख को देखते हुए चीन को अपने पांव पीछे खींचने पड़े। हालांकि वह गिदड़ भभकी देता रहा है।
बता दें, 15 जून 2020 को हुए हिंसक झड़प 1967 में नाथू ला झड़प के बाद की सबसे बड़ा संघर्ष था। नाथू ला में चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे, इस संघर्ष में भारत के भी 80 जवानों को जान से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद 1975 में चीन की सेना के साथ हुए संघर्ष में चार भारतीय सैनिक मारे गए थे।