किसान संगठन सरकार से वार्ता को तैयार लेकिन इन शर्तों के साथ…

सरकार की तरफ से किसानों को 6ठें दौरा की वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया जिसे किसान संगठनों ने स्वीकार कर लिया। 30 दिसंबर को होगी वार्ता
केन्द्र सरकार के नए कृषि कानून को लेकर देशभर के किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसान संगठन ने सरकार से नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। किसानों को मनाने के लिए ने अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला है। किसान जहां नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं तो वहीं सरकार वार्ता के जरिए गतिरोध दूर करने की बात कह रही है।
अब एक बार फिर सरकार के वार्ता प्रस्ताव पर किसान संगठनों ने हामी भर दी है। लेकिन उन्होंने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। अब देखना ये है कि क्या सरकार और किसानों के बीच बीते एक माह से ज्यादा चल रहा आंदोलन किसी सकारात्मक हल तक पहुंच पाएगा।
सोमवार को सरकार की तरफ से किसानों को वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया। किसान संगठनों की तरफ से सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है। हालांकि वार्ता के लिए तैयार किसान संगठनों में किसी तरह की नरमी देखने को नहीं मिली है लेकिन किसानों का वार्ता के लिए तैयार हो जाना एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
किसान संगठन नए कानून को रद करने के साथ ही एमएसपी की गारंटी की मांग पर अड़े हैं। इसके अलावा पराली जलाने पर जुर्माना न लगाने और बिजली अध्यादेश में बदलाव करने की मांग कर रहे हैं। इन सभी मुद्दों को वार्ता में शामिल किया जा सकता है।
किसान संगठनों मे सरकार के भेजे प्रस्ताव पर चर्चा के बाद 30 दिसंबर को वार्ता का समय तय किया है। कृषि सचिन संजय अग्रवाल के अनुसार, किसान संगठनों के भेजे गए प्रस्ताव में उन तमाम मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी जिसे लेकर किसान आशंकित हैं। उन्होंने कहा किसानों की समस्या को हल करने के लिए सरकार की नीयत साफ है और वह खुले मन से प्रासंगिक मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली के विज्ञान भवन में वार्ता 30 दिसंबर को दोपहर के 2: 00 बजे शुरु होगी। इसके पहले सरकार और किसान संगठनों के बीत पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन दोनों पक्ष अपने रुक पर कायम हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि एक माह से चल रहे आंदोलन बदस्तूर जारी है।
इस बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर ने किसान आंदोलन और विपक्ष की भूमिका पर बयान जारी करते हुए कहा, नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानोंं के बीच सुनियोजित तरीके झूठ की दीवार खड़ी की गई। ऐसा लंबे समय तक नहीं चलेगा। आंदोलनरत किसानों को जल्द सच्चाई का अहसास होगा और झूठ की दीवार गिरेगी। उन्होंने कहा नया कृषि कानून किसानों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर लाया गया है, इससे गरीबों और लघु व सीमांत किसानों को जरुर फायदा पहुंचाएगा।