किसान आंदोलनः विदेशियों की टिप्पणी पर सरकार ने कहा- इस तरह की टिप्पणी ‘अनुचित और अस्वीकार्य’

केन्द्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में देशभर के किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के इस आंदोलन को देश के लोगों का संर्थन मिल रहा है। किसानों के इस प्रदर्शन को अब राजनीतिक दलों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। राजनीति स्वार्थ के चलते राजनीतिक दल अब इस आंदोलन को हस्तगत कर लिया है।
किसान संगठन भले ही कहें कि उनका राजनीतिक दलों से कोई मतलब नहीं लेकिन मौकापरस्त राजनीति ने अपनी चाल चल दी है। इस बीच किसान आंदोलन को लेकर विदेशियों की भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
फिलीपिंस की पॉप स्टार रिहाना और पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्न ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है। विदेशियों की किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देने पर केन्द्र सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। केन्द्र ने संसद को बताया कि किसी भी विदेशी सरकार ने केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की समर्थन नहीं किया है।
इस मामले को एआईएमएईएम के सांसद इम्तियाज जलील सैयद ने आंदोलन के समर्थन करने वाले पीआईओ और देशों अगर कोई हो, पर विदेश मंत्रालय को सवालों की सूची सौंपी है।
किसान आंदोलन पर विदेशी प्रतिक्रिया पर विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा- कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने किसानों से संबंधित मुद्दों पर एक टिप्पणी की थी और कनाडा को अवगत कराया गया था कि भारत के आंतरिक मामलों से संबंधित इस तरह की टिप्पणी “अनुचित” और “अस्वीकार्य” है।
बाद में, कई मंत्रियों ने दावा किया कि यह ‘अंतरराष्ट्रीय प्रचार’ का एक हिस्सा था जिसका उद्देश्य भारत और उसकी सरकार को बदनाम करना था। विदेश मंत्रालय ने इससे पहले एक बयान जारी कर कहा था कि किसानों के विरोध पर ट्वीट करने वाली हस्तियां न तो सटीक थीं और न ही जिम्मेदार।
उन्होंने कहा कि “किसी भी विदेशी सरकार ने भारतीय संसद द्वारा पारित तीन बिलों के खिलाफ भारतीय किसानों के आंदोलन को समर्थन नहीं दिया है।
कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में, भारतीय कृषि बिल से संबंधित मुद्दों पर कुछ प्रेरित पीआईओ द्वारा विरोध किया गया है।
दिसंबर की शुरुआत में, ट्रूडो ने भारत में आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करते हुए कहा था कि कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा, और उन्होंने स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
मुरलीधरन ने कहा “कनाडा सरकार ने चिंता के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए किसानों के साथ चल रही बातचीत के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है।