किसान आंदोलनः कृषि कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव को किसानों ने ठुकराया, कहा- बलिदान को व्यर्थ नहीं जाएगा

केन्द्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में बीते दो माह से ज्यादा समय से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान किसान और सरकार के मध्य 10 दौर की वार्ता हो चुकी है। नौ दौर की वार्ता बेनजीता रही। दसवें दौर की वार्ता में सरकार ने किसानों के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा था। सरकार की तरफ से कहा गया था कि किसान और सरकार की एक संयुक्त कमेटी बना दी जाए। वह अपनी रिपोर्ट देगी जिसके आधार पर कानूनों पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार की तरफ से कहा गया था कि तब तक कानूनों को होल्ड पर रखा जाएगा।
वार्ता में शामिल किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव पर कहा था कि उनके साथ 500 से ज्यादा संगठन हैं उनके विमर्श के बाद सरकार को सूचित किया जाएगा। गुरुवार शाम को किसान संगठनों ने सरकार को अपना निर्णय सुना दिया। किसान संगठनों ने सरकार के डेढ़ साल तक कानूनों को रोकने के प्रस्ताव को सिरे से नाकार दिया। किसान संगठनों ने एक बार साफ कर दिया कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और एमएसपी की गारंटी दी जाए।
अब सरकार और किसान संगठनों के मध्य 11वें दौर की वार्ता होनी है। 11वें दौर के पहले किसान संगठनों का ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि अपनी मागों पर वह अभी भी अडिग हैं। दो माह के बाद अगर अपनी मांगों से पीछे हटे तो यह किसानों के साथ दगा करने जैसा होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता दर्शपाल ने कहा, मोर्चा इस आंदोलन में अबतक 147 किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इस जनांदोलन को लड़ते-लड़ते ये साथ हमसे बिछड़े हैं। इनके बलिदान को यूं ही व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।