किसान नेताओं की देशवासियों से अपीलः आज की भूख हड़ताल में हों शामिल

नए कृषि कानूनों के विरोध में लामबंद किसान संगठनों ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में हुए बवाल को लेकर आज प्रायश्चित करने के लिए भूख हड़ताल करेंगे। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि वह भी एक दिन का उपवास रख कर हमारे हौसले को बढ़ाएं। किसान नेताओं ने देशभक्ति को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के तिरंगे के प्रति सम्मान को लेकर उनकी सीख की जरुरत नहीं। हमारे बच्चे देश की सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे हैं।
आज की भूख हड़ताल को लेकर योगेन्द्र यादव ने कहा, हमारी आज की भूख हड़ताल गणतंत्र दिवस के अवसर पर की गई हिंसा को लेकर है। हालांकि इस हिंसा में हमारे किसान शामिल नहीं थे लेकिन हिंसा की जिम्मेदारी लेते हुए हमने भूख हड़ताल का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा मोदी जी और योगी जी को अब ये जान लेना चाहिए कि किसान इस आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
किसानों के दोबारा आंदोलन में कूदने से हरियाणा सरकार को भी झटका लगा है। उन्होंने हड़ताल का ताप को कम करने के लिए शाम 5 बजे तक अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, पानीपत, हिसार, जींद, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, रेवाड़ी और सिरसा में वॉयस कॉल को छोड़कर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है। किसान नेताओं ने प्रदर्शन की जगहों पर इंटरनेट व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
दूसरी तरफ केवल किसानों का यह आंदोलन अब राजनीतिक दलों के हाथों में जाता नजर आ रहा है। हालांकि भाकियू नेता और योगेन्द्र यादव ने इसे खालिस किसान आंदोलन कहा था लेकिन अब ये भी लोग राजनीतिक दलों से हाथ मिलाने में परहेज नहीं कर रहे हैं। तकरीबन सभी राजनीतिक दल इस आंदोलन को समर्थन दे रहा है। इस समर्थन के बहाने डूबती नैया पार लगाने की जुगत लगाए हैं।
कांग्रेस नेता समेत सभी दलों के नेताओं ने केन्द्र सरकार के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जयंत पाटिल ने भी किसानों का समर्थन किया है. पाटिल ने कहा-कोई भी 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को सही नहीं ठहरा रहा है लेकिन किसानों की मांगों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।