भारतीय जवानों के आक्रामक तेवर का असर- सिक्किम के नाकु ला में भी चीन ने कम की पेट्रोलिंग

भारत-चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों के तेवर अब काम करने लगे हैं। पूर्वी लद्दाख में बीते 10 माह से चल रहे तनाव कम होते दिख रहे हैं। चीन की सेना अब वापस लौटने लगी है। पैंगोंग त्सो पर भारतीय सेना और चीन की पीएलए के संयु्क्त प्रयास के बाद चीन के तेवर ढीले हो गए हैं। भारतीय सैनिकों के इसी आक्रामक रुख के कारण चीन ने अब सिक्किम के नाकु ला पर भी अपनी पेट्रोलिंग कम कर दी है।
हालांकि भारतीय सैन्य प्रमुख ने भारतीय सैनिकों को आगाह किया है कि वह चीनी सैनिकों पर पैनी नजर रखें और अपनी आक्रामकता को कम न होने दें। उनका यह बयान चीन की धोखेबाजी की तरफ भी इशारा करता है।
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने नाकु ला को लेकर चीन से किसी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया है। सैन्य कमांडरों की माने तो पैंगोंग त्सो में दोनों सेनाओं के मध्य हुए समझौत के बाद बीजिंग की ओर से नाकु ला पर तनाव कम करने की कोशिश की जा रही है। यही वजह की चीन ने नाकु ला में पेट्रोलिंग कर कर दी है।
बता दें कि चीन की सेना से जुड़ा हर एक फैसला लेने का अधिकार राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले केंद्रीय सैन्य आयोग के पास है, जो कि चीन के रक्षा बलों के कमांडर-इन-चीफ भी हैं।
पैंगोंग झील पर हुए समझौते के हिसाब से दोनों सेनाएं अग्रिम मोर्चे पर लौटेंगी। इसके बाद चीन की सेना नॉर्थ बैंक में फिंगर 8 की पूर्व दिशा की तरफ होगी जबकि, भारतीय सेना की टुकड़ियां फिंगर 3 के पास स्थायी बेस धन सिंह थापा पोस्ट पर होंगी। वहीं, दक्षिण किनारे को लेकर भी सेनाएं इसी तरह की कार्रवाई करेंगी।
चीन के साथ पैंगोंग झील समझौते के बाद अब भारत देपसांग क्षेत्र पर बातचीत करने की तैयारी कर रहा है। कमांडर स्तर की बैठक में इस क्षेत्र पर बड़ा फैसला आ सकता है। कहा जा रहा है कि भारत बैठक में देपसांग का मुद्दा उठा सकता है।