कोर्ट ने कहा, ये दस्तावेज नागरिकता साबित करने का है पर्याप्त सबूत

कोर्ट ने कहा आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा ये दस्तावेज़ नागरिकता साबित करने के उद्देश्य से नहीं बनाए गए हैं…
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश भर में अफरा तफरी मची है। हर व्यक्ति नागरिकता को लेकर सतर्क हो रहा है। नागरिकता को लेकर शाहीन बाग दो माह से जल रहा है। इस बीच मुंबई की एक अदालत ने नागरिकता को साबित करने के लिए एक दस्तावेज को बिल्कुल मुफीद माना है। हालांकि अदालत ने कई ऐसे दस्तावेजों को नागरिकता साबित करने से इनकार कर दिया जिसे लेकर माना जा रहा था कि ये दस्तावेज हर लिहाज से नागरिकता को साबित कर सकते हैं। इसके पीछे तर्क यही था कि जब इसमें एक व्यक्ति से जुड़े सभी प्रमाण मौजूद हैं तो ये नागरिकता को साबित करने के पर्याप्त प्रमाण हो सकते हैं।
ये दस्तावेज नागरिकता साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं
मुंबई के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने नागरिकता साबित करने के प्रमाण को लेकर बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा ये दस्तावेज़ नागरिकता साबित करने के उद्देश्य से नहीं बनाए गए हैं।
बांग्लादेशी दंपत्ति को अवैध निवास पर किया गया था गिरफ्तार
इसके अलावा कोर्ट ने कहा, इन दस्तावेजों में एक ऐसा दस्तावेज भी है जिसे नागरिकता हासिल करने का पर्याप्त सबूत माना जा सकता है। मुंबई के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए एक दंपति को बांग्लादेशी घुसपैठिया होने के आरोपों से बरी कर दिया। बता दें, इस दंपति को 2017 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने और मुंबई में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
मतदाता पहचान पत्र को माना नागरिकता हासिल करने का पर्याप्त सबूत
कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पासपोर्ट को मूल प्रमाण के तौर पर माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा, मतदाता पहचान पत्र को भी नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा, मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए जन प्रतिनिधि अधिनियम के फार्म 6 के तहत किसी भी व्यक्ति को प्राधिकरण के समक्ष नागरिकता के तौर पर घोषणा पत्र दाखिल करना होता है कि वह भारत का नागरिक है। यदि घोषणा गलत पाई जाती है तो नागरिक दंड का अधिकारी होता है।
अभियोजन पक्ष दस्तावेजों को फर्जी साबित नहीं कर पाया
कोर्ट ने कहा, अब्बास शेख (45) और राबिया खातून (40) ने अपना नागरिकता साबित करने के लिए मतदाला पहचान पत्र समेत अन्य मूल दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश किए हैं। हालांकि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि दंपति की ओर से पेश किए गए सभी दस्तावेज फर्जी हैं लेकिन वे इसे साबित करने में नाकाम रहे। इस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष इस बात को साबित करने में नाकाम रहे कि आरोपी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज फर्जी हैं।