कोरोना संक्रमणः लोगों की जान की कीमत पर सत्ता हासिल करने की बाजीगरी…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत तमाम नेताओं ने कभी इस बात पर आंशिक तौर पर भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। लोगों की जान की कीमत पर सत्ता हासिल करने का ये खेल वह कर रहे हैं जो कोरोना संक्रमण को लेकर देशवासियों को नसीहतें देते रहते हैं…
देश के तमाम नागरिकों के मन में एक सवाल कौंध रहा है। वह जानना चाहते हैं आखिरकार चुनावी राज्यों के निवासी ऐसी कौन सी दवा खा रहे हैं जिससे उनमें गजब की एंटीबॉडी बन गई है। वह चुनावी रैलियों में पूरे जोश से हिस्सेदारी कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत तमाम नेताओं ने कभी इस बात पर आंशिक तौर पर भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। लोगों की जान की कीमत पर सत्ता हासिल करने का ये खेल वह कर रहे हैं जो कोरोना संक्रमण को लेकर देशवासियों को नसीहतें देते रहते हैं।
अब विशेषज्ञ कह रहे हैं चुनावी राज्यों में होने वाली रैलियों के कारण कोरोना संक्रमण के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार लोगों से एहतियात बरतने को कह रही है। लेकिन सरकार के उन किरदारों को कौन समझाए कि उन्हीं की करतूतों के कारण संक्रमण की रफ्तार में तेजी आ रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार- बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 72,330 नए केस सामने आए हैं। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा, चुनावी राज्यों में होने वाली रैलियों ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। राजनेताओं की इस तरफ गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के अनुसार तीन चुनावी राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में कोरोना वायरस संक्रमण के पीछे चुनावी रैलियां अहम वजह हैं। रैलियों में कोरोना नियमों का पालन न होने के कारण इन राज्यों में संक्रमण के मामले कई गुना बढ़े हैं।
तमिलनाडु में कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों की संख्‍या में 386 फीसदी की बढ़ी, पश्चिम बंगाल में 190 फीसदी, पुडुचेरी में भी कोरोना के नए 20 से बढ़कर 115 हो गए हैं।
एम्‍स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा- इन चुनावी राज्‍यों में अधिक ध्‍यान देने की जरूरत है। कुछ हफ्ते पहले स्‍वास्थ्‍य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल का जिक्र होता था। लेकिन अब बुलेटिन में इनका नाम नहीं होता है।