विधानसभा में बोले सीएम योगीः पगड़ी पहनकर आते तो स्वागत करता, सदन में ड्रामेबाज टोपी पहनकर आते हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ विपक्ष को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने कहा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद है, राज्यपाल का अभिभाषण सरकार का दस्तावेज होता है जिससे सदन को प्रदेश की विकास की दिशा मिलती है। इसकी अवहेलना लोकतंत्र की आत्मा पर चोट करना होता है। इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर तंज किया। उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष अच्छे आदमी हैं लेकिन बैठे गलत पार्टी में हैं और भटक गए हैं।
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने विपक्ष की टोपी को लेकर भी तंज किया। उन्होने कहा सदन में विभिन्न तरह की टोपियां किसी ड्रामे के किरदार से दिखते हैं। ये किसी ड्रामा कंपनी की तरह लगती हैं।

उन्होंने कहा, ढाई साल का बच्चा टोपी पहने व्यक्ति को गुंडा समझता है। उन्होने कहा, प्रतिपक्ष पगड़ी पहनकर आते तो मै स्वागत करता। नेता प्रतिपक्ष को टोपी लगाने से परहेज करना चाहिए।
उन्होंने कहा नेता प्रतिपक्ष को इस उम्र में टोपी लगाकर आना शोभा नहीं देता। सीएम योगी ने चर्चा में शामिल सभी सदस्यों का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष अपने घर बलिया भी सीधे नहीं जाते, नेता प्रतिपक्ष को पता नहीं अयोध्या जाने से डर लगता है? नेता प्रतिपक्ष के बीमार होने पर हमने खुद लगातार संवाद किया। बीमारी के चलते ही मैने उनसे सदन में कम बोलने का निवेदन किया था।
सीएम योगी ने कहा कि बीते वर्ष यूपी की विधानसभा में संवैधानिक अधिकारों के साथ दायित्वों पर भी चर्चा हुई थी। राज्यपाल का सम्मान करना सभी दलों का दायित्व है। राज्यपाल किसी पार्टी का नहीं पूरे प्रदेश का होता है।
राज्यपाल पर टिप्पणी करना पीड़ादायक है। आज जन प्रतिनिधि लाख कोशिशों के बावजूद जनता का विश्वासपात्र नही बन पाता है क्योंकि आज जनप्रतिनिधि ही एक दूसरे का सम्मान नहीं करते।
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने अज्ञेय की कुछ पंक्तियों के जरिए विपक्ष पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, ‘सर्प तुम कभी नगर नहीं गए, नहीं सीखा तूने वहां बसना, तो फिर कहां से विष पाया, कहां सीखा डासना।
सीएम ने कहा कि राज्य के प्रति सिर्फ सत्ता पक्ष का ही नहीं विपक्ष का भी दायित्व है। एनसीआरबी के आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर प्रदेश को बदनाम करते हैं।
सीएम योगी ने कोरोना के लिए आर्थिक मदद के लिए सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, कोरोना काल मे किसी चीज की कमी नहीं होने दी। सीएम ने पीएम मोदी का आभार जताया। डब्ल्यूएचओ ने भी यूपी के कोरोना प्रबंधन को सराहा है। डब्ल्यूएचओ ने ऐसा करके पूरे यूपी के लोगो को सम्मानित किया है।

सीएम ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के एक व्यक्ति ने किसी जिले में पल्स आक्सीमीटर घोटाले का आरोप लगाया था। जिसकी भी हमारी सरकार ने जांच कराई।
हमने दिल्ली के भी रेट मंगाए थे, जहां यूपी से महंगे दाम पर खरीद हुई। दिल्ली में महंगे दाम पर खरीद होने के बाद उस व्यक्ति की जुबान नहीं खुली।
सीएम योगी ने आगे कहा कि यूपी ने श्रमिकों और रिक्शेवाले के भरण-पोषण भत्ता भी दिया गया। भत्ते की राशि महत्वपूर्ण नहीं थी, डूबते को तिनके का सहारा ही बहुत होता है।
हर गरीब को माह में 2-2 बार राशन दिया गया। सरकार ने कोटा से छात्रों को बुलाने का कार्य किया। राजस्थान सरकार से मदद न मिलने के बावजूद हम छात्रों को लाये। कोरोना काल में बस चलाने वाले परिवहन निगम के चालको-परिचालकों का अभिनंदन करता हूं।
सीएम ने कहा कि कम्युनिटी किचन के जरिये करोड़ो फ़ूड पैकेट घर-घर जाकर बांटे गए। कोरोना काल में स्वच्छता, स्वास्थ्य और पुलिस कर्मियों ने बेहतर काम किया। कोरोना काल के दौरान PRV-112 ने सराहनीय कार्य किया।
यूपी से गुजरने वाले हर व्यक्ति को उपलब्ध भोजन कराया गया। सिर्फ सरकार ने नही जनप्रतिनिधियों, राजनैतिक दलों और स्वयंसेवियों ने मदद की।
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होने कहा, जिन्हें यूपी के लोगों ने सांसद बनाया वो केरल जाकर यूपी के लोगों की खिल्ली उड़ा रहे हैं।
इसके बाद सदन में कांग्रेस ने सीएम के बयान पर हंगामा शुरू कर दिया। हमने किसी का नाम नहीं लिया, चोर की दाढ़ी में तिनका। यूपी और अमेठी के लोगो को कौन अपमानित कर रहा है?
सीएम ने प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए इशारों-इशारों में कहा कि यूपी आएंगे तो मंदिर भी याद आने लगता है। जानते है वृंदावन को बचाओ। जिसका कंस बाल बांका नहीं कर पाया उसका और कौन बाल बांका कर पायेगा।
जब सेना बॉर्डर पर दुश्मनों को जवाब देती है, तो सेना को हतोत्साहित किया जाता है। आपके पास इटली जाने का समय था, अमेठी आने का नहीं। ये मानसिकता हम सबको चिंता में डालती है।
सीएम योगी ने कहा, कोविड के दौरान भी मुझसे एक हजार बस देने की बात कही गई। कांग्रेस महासचिव का पत्र आया कि 1000 बस देना चाहती हूं, मैं खुश हुआ। लेकिन जब जांच कराई तो कोई स्कूटर तो कोई थ्री व्हीलर निकला। ये मज़ाक नहीं था तो क्या था? हर चीज़ में राजनीति नही करनी चाहिए।
किसी के यहां दुःखद घटना होगी और आप डीजे बजायेंगे तो कैसा लगेगा? स्वाभिमानी व्यक्ति होगा पटककर मारेगा। अब केरल में भी जाकर यही किया जा रहा है। अगर कांग्रेस बस देना चाह रही थी तो कोटा में फंसे छात्रों को बस क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई? महामारी के दौरान कांग्रेस ने भद्दा मजाक किया।