स्मार्ट फोन के जरिए चेक करें अपना हार्ट रेट और रेस्पिरेटरी रेट, गूगल अगले माह लॉच करेगा नया फीचर

स्वास्थ्य के प्रति जागरुक लोग नियमानुसार अपना हेल्थ चेकअप कराते हैं। इसके लिए उन्हें किसी पैथोलॉजी तक का चक्कर लगाना पड़ता है। खास तौर पर जब उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत होती है तो वह सबसे पहले अपना पल्स रेट और रेस्पिरेटरी रेट चेक कराते हैं। लेकिन अब पल्स रेट और रेस्पिरेटरी रेट चेक आप खुद चेक कर सकते हैं। आपके मोबाइल में इसके चेक करने के फीचर एड किए जा रहे हैं। गूगल की ओर से कहा गया है कि अगले माह से यह सुविधा शुरु हो सकती है।
गूगल ने कहा, ये सुविधाएं पिक्सल फोन के लिए ‘गूगल फिट’ ऐप में उपलब्ध होंगी। गूगल इसके लिए कैमरा और कंप्यूटर विजन टेक्निक का इस्तेमाल करेगा। जिसे ऑप्टिकल डिटेक्ट भी कहते हैं। हार्ट रेट के लिए ये तकनीक कैमरा का यूज होगा। जब भी आप फ्रेश ऑक्सीजन लेते हैं तो हार्ट के जरिए आपके पूरे शरीर में पहुंचती है और कैमरे की मदद से बदलते उंगलियों के रंग से हार्ट रेट का पता लगाया जा सकता है।
गूगल के हेल्थ टेक्नोलॉजी के निर्देशक श्वेतक पटेल ने बताया, ये फीचर गूगल फिट ऐप में रहेगा जो कि अभी पिक्सेल फोन में मौजूद होगा, आगे चलकर एंड्राइड फोन में भी इसकी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
अगले महीने से शुरू हो रहे इस तकनीक से आप हार्ट रेट और रिस्पिरेटरी रेट आप अपने फोन के कैमरे से ही माप सकते है। रिस्पिरेटरी रेट के लिए आपको अपना सर और चेहरा कैमरा के सामने लाना है और हार्ट रेट के लिए आपको अपनी उंगली फोन के रियर कैमरे के लेंस पर रखना होगा।
अपने फोन से लिए गए पल्स रेट या रेस्पिरेटरी रेट को मेडिकल डायग्नोसिस स्थिति का मूल्यांकन के लिए नहीं कर सकते हैं। श्वेतक पटेल ने उम्मीद जताई है कि लोग इस ऐप सेडेली अपनी वैलनेस को माप सकते हैं जिससे उनका यह पता चल सकेगा का उनका स्वास्थ्य कैसा है। इस प्रोडक्ट को लॉन्च करने से पहले गूगल ने इसकी एक्यूरेसी जांच करने के लिए प्रारंभिक क्लीनिकल वेरिफिकेशन किया, और कई लोगो पर किए गए जांच में इसे हर सांस को काउंट करने में सही पाया।
बता दें, ह्रदय गति पता करने के लिए प्रयोग की जाने वाली प्रक्रिया को फोटोप्लेथ्समोग्राफी (PPG) कहा जाता है, जिसे आमतौर पर स्पेशल सेंसर का उपयोग करके पिक किया जाता है। Fitzpatrick पैमाने के अनुसार, गूगल ने पहले ही विभिन्न प्रकार की स्किन वाले लोगों के बीच एल्गोरिदम के प्रदर्शन की जांच करने के लिए प्रारंभिक नैदानिक ​​सत्यापन पूरा कर लिया है। इसकी एल्गोरिथ्म को सभी श्रेणियों में औसतन दो प्रतिशत के भीतर सटीक पाया गया है।
पटेल के अनुसार, इन सुविधाओं से स्मार्टफोन की कैमरे का उपयोग पिक्सेल स्तर पर छोटे भौतिक संकेतों को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है जैसे कि छाती के मूवमेंट्स को उनकी रेस्पिरेटरी रेट और परिवर्तनों को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
बता दें, श्वसन गति 16 से 18 प्रति मिनट के बीच होती है। नाडी की औसत गति 68 से लेकर 90 तक होती है और श्वसन गति 20 से 30 प्रति मिनट होती है।