पंजाब हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः 15 साल की उम्र के बाद मुस्लिम लड़की किसी से भी कर सकती है शादी

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुस्लिम लड़की की शादी की उम्र को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम लड़की रजस्वला (15 साल से ऊपर) के बाद किसी से भी शादी कर सकती है। मामला मोहाली के एक नवदंपति का था। यहां पर एक 17 साल की मुस्लिम लड़की ने एक 36 साल के युवक से निकाह किया था।
दंपति ने लड़की की उम्र कम बताते हुए विवाह की खिलाफ थे। लड़की सुरक्षा को लेकर ये दंपति हाईकोर्ट पहुंचा था। जहां पर कोर्ट ने इस शादी को जायज करार दे दिया। इसके लिए कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और विभिन्न अदालतों के निर्णय को आधार बनाया। कोर्ट ने कहा मुस्लिम लड़की 18 साल के कम उम्र में भी शादी कर सकती है। फैसला हाईकोर्ट की जस्टिस अलका सरीन ने सुनवाया।
इस दंपति ने 21 जनवरी को मुस्लिम रीति से निकाह किया था। लड़की की उम्र को लेकर दोनों परिवारों के लोग नाखुश थे। इस मामले को लेकर दोनो ने माहाली एसएसपी को एक शिकायती पत्र लिखा था। यहां कार्रवाई न होने के कारण दंपति हाईकोर्ट पहुंचा, यहां पर कोर्ट ने शादी को जायज करार दिया।
कोर्ट में अपनी दलील देते वकील ने कहा, मुस्लिम कानून में रजस्वला के बाद शादी की बात कही गई है। मुस्लिम धर्म में 15 साल की लड़की को जवान माना जाता है। हाईकोर्ट ने सर डी. फरदुनजी मुल्ला की पुस्तक प्रिंसिपल्स आफ मोहम्मडन ला का हवाला देते हुए यह माना कि एक मुस्लिम लड़का या लड़की, जो युवा हो चुके हों, वे किसी से भी अपनी पंसद के मुताबिक शादी कर सकते हैं। दोनों के परिजनों व रिश्तेदारों को भी इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।