जान बचानों वालों पर हमलाः अगर इन्होंने काम करने से इनकार कर दिया तो क्या होगा…

इंदौर में हुई शर्मसार कर देने वाली घटना के बाद मशहूर शायर राहत इंदौरी बेहद दुखी हैं। उनके शब्द बयां करते हैं कि इस जाहिलाना हरकत से वह कितने बेजार हैं। उन्होंने कहा, अपने शहर की घटना से सिर शर्म से झुक गया, यह हमलावर सोच कोरोना से बड़ा वायरस है…
‘तूफानों से आंख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो’ लेकिन कैसे? सवाल बड़ा है क्योंकि जिंदगी बचाने वालों की खुद की जिंदगी के लाले पड़े हैं। जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाने निकले देवदूत आगे का सफर कैसे तय कर पाएंगे। उनके भी परिवार हैं, उनके भी बच्चे हैं पत्नी है मां-पिता हैं फिर भी निकल पड़े हैं आपके लिए अपने देश के लिए। उनके साथ ऐसा व्यवहार, कोई उन पर थूक रहा है तो कोई पत्थर बरसा रहा है, सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को पीटा जा रहा है आखिर क्यों, किसने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा है या फिर ये स्वयं ऐसा कर रहे हैं? ये जांच की विषय है लेकिन ऐसी शर्मनाक घटना होती रही तो क्या कोरोना वायरस का जंग जीता जा सकता है? जरा सोचिए कई बार सोचिएगा डॉक्टर्स और सुरक्षाकर्मियों पर हमले से बाद अगर इन्होंने काम करने से इनकार कर दिया तो क्या होगा…
कोरोना जाति और धर्म नहीं देखता, जो मुनासिब दिखा सवार हो गया
हर कोई समझा रहा है अपने देश में ही नहीं विदेशों से भी कोरोना को लेकर तमाम समझदारी की बातें की जा रही हैं। इलाज के नाम पर फिलहाल हाथ खाली हैं, कोई वैक्सीन या दवा हमारे हाथ नहीं है, केवल एक ही चारा है हम घरों में रहें, दूरी बनाकर रहें। इसमें किसी धर्म, जाति, क्षेत्र या व्यक्ति की बात नहीं यह सबके लिए है तो फिर इसे लेकर इतनी उहापोह क्यों? कोरोना किसी धर्म, जाति, क्षेत्र या व्यक्ति को देखकर संक्रमित नहीं करता उसे तो जो भी मुनासिब दिखा उस पर सवार हो गया और फिर क्या होगा बताने की जरुरत नहीं। फिर जांच क्यों नहीं…
आजमाइश बड़ी है, मिलकर लड़ना है
यहां यह बताना बेहद जरुरी है कि पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण 10 लाख का आंकड़ा छूने वाला है और इससे दुनियाभर में 50 हजार से ज्यादा जाने जा चुकी हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है, भारत में संक्रमितों की संख्या ढाई हजार के आंकड़े को छू रही है तो मौतों का आंकड़ा 68 पार कर चुका है। हर दिन प्रतिपल आंकड़ों में बढ़रोत्तरी देखी जा रही है। आजमाइश बड़ी है हमे साथ मिलकर लड़ना है लेकिन हम साथ नहीं दे रहे हैं। क्यों कोई धर्म की आड़ लेकर इस लड़ाई को रोकना चाहता है क्यों नहीं धर्म के सहारे इसे जीतने का जज्बा दिखाया जा रहा है।
क्यों मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हो रहे हमले
अब यह समझने का वक्त है समझाने का नहीं। बहुत समझाया जा चुका है लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं हो रहे हैं। कोरोना वायरस को हरान के लिए पुलिस, डॉक्टर्स, सफाईकर्मी, आशा बहुएं और भी ढेर सारे लोग लगे हैं। लेकिन लोगों की जान बचाने वालों पर हमले किए जा रहे हैं, उनके साथ बदसलूकी की जा रही है। ये हमले अधिकांश उन इलाकों में हो रहे हैं जो मुस्लिम बाहुल्य हैं। ऐसा क्यों है…इस पर मंथन करने की जरुरत है।
फिर भी देवदूतों का हौसला नहीं टूटा
दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज से क्वारैंटाइन किए गए डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों ने पुलिस और डॉक्टर से बदसलूकी की। उन पर थूका और गालियां दीं। ऐसा ही कुछ इंदौर में भी हुआ। यहां बुधवार को एक इलाके में संक्रमितों की जांच करने गई टीम पर हमला हुआ। पत्थर फेंके गए। कई डॉक्टर्स को चोटें आईं लेकिन उनका हौसला टूटा नहीं, वह अगले दिन फिर उसी इलाके में पहुंची जहां उन पर पत्थर बरसाए गए थे। हर किसी को समझाया गया कुछ समझे कुछ अभी भी समझने को तैयार नहीं। उन्हें अपने धर्मगुरुओं पर ज्यादा भरोसा है बनस्पति इसके की डॉक्टर्स की सलाह मानें।
राहत इंदौरी ने कहा-मै शर्मिंदा हूं कि ये मेरा शहर है
इंदौर में हुई शर्मसार कर देने वाली घटना के बाद मशहूर शायर राहत इंदौरी बेहद दुखी हैं। उनके शब्द बयां करते हैं कि इस जाहिलाना हरकत से वह कितने बेजार हैं। उन्होंने कहा, अपने शहर की घटना से सिर शर्म से झुक गया, यह हमलावर सोच कोरोना से बड़ा वायरस है। राहत कहते हैं- कल रात 12 बजे तक मैं दोस्तों से फोन पर पूछता रहा कि वह घर किसका है, जहां डॉक्टरों पर थूका गया है, ताकि मैं उनके पैर पकड़कर माथा रगड़कर उनसे कहूं कि खुद पर, अपनी बिरादरी, अपने मुल्क व इंसानियत पर रहम खाएं। यह सियासी झगड़ा नहीं, बल्कि आसमानी कहर है, जिसका मुकाबला हम मिलकर नहीं करेंगे तो हार जाएंगे।
हर कोई साथ खड़ा लेकिन राजनीति भी जारी है
कोरोना वायरस को लेकर लोग भयभीत हैं, समाज, सियासत और मानवाधिकार आयोग भी सक्रिय है। पीएम मोदी से लेकर समूचा विपक्ष कोरोना को परास्त करने के लिए एक साथ खड़ा है लेकिन राजनीति है कि मानती ही नहीं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव सरकार पर हमलावर हैं कि लॉकडाउन के पहले तैयारी नहीं की गई तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी कुछ ऐसा ही सोचती हैं। लेकिन कोई ये नहीं सोचता मुसीबतें बता कर नहीं आतीं, जब आती हैं तो ऐसे निर्णय अकस्मात लेने पड़ते हैं और देश को उसे मानना पड़ता है।
पीएम मोदी ने फिर की अपील
एक बार फिर पीएम मोदी ने देश से सभी मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि सब लोग मिलकर कोरोना को परास्त करने में सहयोग करें। सब भागीदार बनें। उन्हें इस बात का बेहद अफसोस था कि कोरोना के खिलाफ जान की बाजी लगाने वालों पर हमले किए जा रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कोरोना को परास्त करने की इस लड़ाई में सभी धर्मों और पंथों के धर्मगुरुओं का साझीदार बनाया जाए।
सुरक्षाकर्मियों और डॉक्टर्स पर हमले हुए, शर्मसार करने वाले मामलों पर एक नजर…
1-धर्म की तालीम लेने वालों ने डाक्टर्स पर थूका
नई दिल्ली के निजामुद्दी स्थित मरकज में शामिल 2000 से ज्यादा तबलीगी जमातियों को बाहर निकाला गया। 167 को क्वारैंटाइन सेंटर ले जाया गया। लेकिन ऐसी धार्मिक तालीम लेने का क्या फायदा है जो जाहिल ज्यादा बनाती हो। इन जामितियों ने पूरी इमारत में जगह-जगह थूका। इतना ही नहीं इन जमातियों ने पुलिस और डॉक्टर्स को गालियां तक दीं।
2- हद हो गई- इंदौर में डॉक्टरों पर पत्थर फेंके
मध्य प्रदेश के इंदौर के टाटपट्टी बाखल इलाके में बुधवार को कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया। सिलावटपुरा में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद टीम संदिग्धों की जांच के लिए आई थी। एक परिवार ने ने अफसरों पर इल्जाम लगाया कि वे क्वारैंटाइन के नाम पर परेशान कर रहे हैं। अब इस परिवार के 3 लोग संक्रमित हैं।
3- शर्मनाक- मुजफ्फरपुर में पुलिसवालों पर जानलेवा हमला
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक 11 साल की बच्ची की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची थी। जांच टीम ने ज्यों ही अपना काम शुरु किया भीड़ ने हमला बोल दिया। भीड़ ने दो पुलिसवालों को पीटकर बुरी तरह से घायल कर दिया। जब स्वास्थ्य विभाग ने जागरूक करने की कोशिश की तो कहने लगे मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई। ऐहतियात बरतने को कहा तो पथराव कर दिया।
4- सहारनपुर में मस्जिद के बाहर जमा लोगों पुलिस पर किया हमला
यहां कोरोना संक्रमण के खतरे को बताते हुए पुलिस ने लोगों के दूरी बनाकर रहने को कहा तो मस्जिद के बाहर इकट्ठा लोगों ने पुलिसकर्मियों से हाथापाई शुरु कर दी। दो पुलिसवालों को गंभीर चोटें आई हैं। कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया लेकिन भीड़ ने उन्हे छुड़ा लिया। 26 लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है।
5- रायपुर-सफाईकर्मियों को लोगों ने पीटा
नगर निगम के कर्मचारी लॉकडाउन के दौरान सैनिटाइजेशन का काम कर रहे थे। लेकिन, यहां कुछ लोगों ने इन कर्मियों से बदसलूकी की। उन्हें मारापीटा।
6-बेंगलुरु आशा कार्यकर्ता पर हमला
बेंगलुरु में कोरोनावायरस से जुड़ा डेटा कलेक्ट करने गई एक आशा कार्यकर्ता पर लोगों हमला बोल दिया। कार्यकर्ता कृष्णावेनी का आरोप है कि एक मस्जिद से लोगों को भड़काया गया और इसके बाद उन पर हमला किया गया।
7. रांची में स्क्रीनिंग करने पहुंची टीम को भीड़ ने भगाया
रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मलेशिया की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। जिस घर से महिला मिली, उसके आसपास के घरों में रहने वालों के स्वास्थ्य की जांच के लिए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम बनाई। टीम गुरुवार को लोगों की जांच करने पहुंची तो स्थानीय लोगों ने इनका विरोध किया। ये लोग प्रशासन पर हिंदपीढ़ी क्षेत्र को बदनाम करने का आरोप लगा रहे थे।
8- जयपुर पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके
रामगंज इलाके में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों पर मंगलवार को कुछ लोगों ने पत्थर फेंके। हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हुए। गुरुवार को इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया।
वक्त है संबल जाओ वरना हाथ मलते रह जाओगे
ऐसी ही शर्मनाक घटना पूरे देश से सामने आ रही हैं। यूपी का रामपुर, बिहार के मुंगेर, धरावी, मधुबनी, कर्नाटक, आखिर क्यों नहीं लोग समझ रहे हैं। कुछ लोगों में यह भ्रांति भी फैलाई जा रही है कि यह भारत सरकार की चाल है जिससे CAA-NRC जैसे मामले दब जाएं तो कुछ लोग इस महज एक अफवाह बताकर लोगों को गुमराह करने का काम किया है। कुछ भी हो कोरोना तो कहर बरपा रहा है। बूरी दुनिया खौफ मे है और भारत इस वायरस के लिए मुफीद जगह है। अगर लोग नहीं माने तो यह दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना सकता है। वक्त है संभल जाओं वरना पछताने के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।