जवानों को 100 दिन की छुट्टी जुमला तो नहींः कितने जवानों को मिला 100 दिन अवकाश, नहीं मिली जानकारी

भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2019 में सीआरपीएफ की नई बिल्डिंग की आधारशिला रखने के दौरान केन्द्रीय सुरक्षा बलों को लेकर अहम घोषणा की थी। उन्होने कहा था कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान 100 दिन की छुट्टी अपने परिजनों के साथ बिता सकेंगे। अमित शाह की इस घोषणा के बाद कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा गृह मंत्रालय से सूचना मांगी थी कि एक साल में कितने जवानों को 100 दिनों का अवकाश मिला।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा मांगी इस सूचना पर गृह मंत्रालय ने कोई सूचना देने के इनकार कर दिया है।
यह खेदजनक है कि इन बलों के जवानों के कल्याण से संबंधित आरटीआई का जवाब तक नहीं दिया गया। इससे वह घोषणा बेमानी लगने लगती है, जिसमें जवानों को अपने परिवार के साथ सौ दिन बिताने की बात कही गई थी।
शक होने लगता है कि कहीं वह घोषणा झूठ तो नहीं थी। बकौल रणबीर सिंह, जवान अपने परिवार के बीच सौ दिन गुजारेंगे, अब वह घोषणा कहीं एक जुमला साबित न हो जाए।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह- भारत सरकार का ऐसा करना असंभव है। मौजूदा समय में जवानों को मात्र 30 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है, ऐसे में सौ दिन की छुट्टी कैसे संभव होगी। इसके लिए जवानों को पहले 60 दिन का वार्षिक अवकाश देना पड़ेगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए एक ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्रालय व सीआईएसएफ हैडक्वार्टर को सौंपा गया था।
इस पर कोई कार्रवाई हुई है, यह जानकारी मांगी गई थी। दिनांक 25 मार्च 2021 को आरटीआई के जवाब में सीआईएसएफ मुख्यालय ने उपरोक्त जानकारी देने में असमर्थता जताई।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि दोनों ही मामलों में आरटीआई एक्ट 2005 की धारा-24 व सब सेक्शन-2 को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
इस एक्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों को भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों के अतिक्रमण को छोड़कर अन्य सूचना देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
एसोसिएशन के मुताबिक, यह आरटीआई दिनांक 28 जनवरी 2021 को लगाई गई थी। इन बलों में सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी व असम राइफल्स शामिल हैं।
आरटीआई के जरिए यह पूछा गया कि कितने जवानों को वर्ष 2020 के दौरान 100 दिन का वार्षिक अवकाश दिया गया है।
सीआईएसएफ से यह जानना चाहा कि मौजूदा समय में जवानों को मात्र 30 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है, ऐसे में सौ दिन की छुट्टी कैसे संभव होगी। इसके लिए जवानों को पहले 60 दिन का वार्षिक अवकाश देना पड़ेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तर्क है, अगर यह नहीं किया जाता है तो सीआईएसएफ जवानों को 100 दिन का अवकाश देना भी संभव नहीं हो सकेगा।
रणबीर सिंह के मुताबिक, भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों व केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में (सीआईएसएफ को छोड़कर) 60 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है।
आकस्मिक छुट्टियों की बात की जाए तो सेना के तीनों अंगों में 30 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाता है। वहीं, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को मात्र 15 दिन का आकस्मिक अवकाश देने का प्रावधान है।आरटीआई में पूछा गया कि क्या सीआईएसएफ जवानों को 30 दिन की बजाय 60 दिन का वार्षिक अवकाश दिया जाएगा।
संबंधित बल ने आरटीआई एक्ट 2005 की धारा-24 व सबसेक्शन-2 को ढाल बनाया। एक्ट के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा बलों में भ्रष्टाचार व मानवाधिकारों के अतिक्रमण को छोड़कर कोई सूचना नहीं दी जा सकती।
एसोसिएशन के महासचिव- केंद्रीय सुरक्षा बलों में कम छुट्टियों, अफसरशाही का गलत रवैया व अन्य घरेलू कारणों के चलते इन सुरक्षा बलों में पिछले छह वर्षों के दौरान 700 कार्मिकों द्वारा आत्महत्या के मामले सामने आए हैं।
यह खेदजनक है कि इन बलों के जवानों के कल्याण से संबंधित आरटीआई का जवाब तक नहीं दिया गया। इससे वह घोषणा बेमानी लगने लगती है, जिसमें जवानों को अपने परिवार के साथ सौ दिन बिताने की बात कही गई थी।
शक होने लगता है कि कहीं वह घोषणा झूठ तो नहीं थी। बकौल रणबीर सिंह, जवान अपने परिवार के बीच सौ दिन गुजारेंगे, अब वह घोषणा कहीं एक जुमला साबित न हो जाए।