बच के रहना ऐसे डॉक्टरों से, पेट दर्द में लगाते हैं सांप का जहर उतारने का इंजेक्शन

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2016 में इस बात का खुलासा किया था कि भारत में एलोपैथ की प्रैक्टिस करने वाले 57 फीसदी डॉक्टरों के पास कोई डिग्री नहीं है इसके अलावा 31 फीसदी डॉक्टर तो केवल 12वीं पास हैं और उनके पास किसी प्रकार का कोई अनुभव भी नहीं है। WHO की इस रिपोर्ट की तस्दीक की वर्ष 2018 में मोदी सरकार के पहले शासनकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे जेपी नड्डा ने। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रहे जेपी नड्डा ने कहा था कि एलोपैथ की प्रैक्टिस करने वाले अधिकांश डॉक्टर झोलाछाप हैं।
पेट दर्द में दिया सांप काटने के बाद दिया जाने वाला इंजेक्शन
अब WHO के इन खुलासों का खामियाजा भारत की आम जनता भुगत रही है। ये डॉक्टर लोगों की जान से खेल रहे हैं और सरकार मौन है। पश्चिम बंगाल के बीरभूमि में पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुए एक दस साल के बच्चे की गलत इंजेक्शन की वजह से मौत हो गई। दरअसल डॉक्टर ने बच्चे को सांप काटने के बाद जो इंजेक्शन दिया जाता है वो इंजेक्शन बच्चे को लगा दिया जिससे बच्चे की मौत हो गई। घटना बीरभूम जिले के रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज की है। मृतक का नाम देवमाल है और चौथी कक्षा में पढ़ने वाला छात्र था।
पिता ने लगाया डॉक्टरों पर आरोप
मृतक बच्चे के पिता ने बताया कि वह बीरभूमि के नलहाटी थाने के गोसाईंपुर ग्राम का रहने वाला है। हमारे दस साल के बच्चे के पेट में दर्द की शिकायत हुई उसके बाद उसे लौहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले गए, वहां पर सही इलाज न मिलने पर रामपुर हाट मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में भर्ती करवाया था। देव के पिता ने आरोप लगाया कि उसके बच्चे के पेट में दर्द है लेकिन डॉक्टरों ने उसे सांप ने काटा है और उसे सांप काटने पर लगने वाला इंजेक्शन लगा दिया जिससे बच्चे की मौत हो गई। देव के पिता ने आरोप लगया कि गलत इलाज के चलते उनके बेटे की मौत हो गई।
यहां डॉक्टरों ने ‘ओ’ पॉजिटिव की जगह ‘ए’ पॉजिटिव खून चढ़ाया

ओ की जगह ए

वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के ही नदिया में डॉक्टरों की एक और बड़ी लापरवाहा सामने आई है। यहां डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला को ‘ओ’ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की आवश्यकता थी डॉक्टरों ने उसे ‘ए’ पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया। खून चढ़ने के बाद महिला की तबियत बिगड़ने लगी। उसे तत्काल दूसरे अस्पताल ले जाया गया तबतक महिला के गर्भ में पलने वाले बच्चे ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों की इस बड़ी लापरवाही से गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
बच्चे की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा
दरसल बुधवार को नदिया जिले के चापड़ा ब्लॉक की जैस्मिन मल्लिक को कृष्णानगर जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। महिला 8 माह की गर्भवती थी। डाक्‍टरों ने महिला जांच में खून की कमी बताई। नर्स ने अस्‍पताल के ब्‍लड बैंक से खून का मंगाया और महिला को चढ़ाया। थोड़ी देर बाद परिजनों का ध्‍यान ब्‍लड बैंक से आए खून के पैकेट पर गया जिसे देखकर सभी चौंक गए। परिजनों ने देखा कि महिला को ओ पॉजिटिव ब्लड के बजाय ओ ब्‍लड ग्रुप का खून चढ़ाया जा रहा है। जिसकी शिकायत नर्स से करने पर नर्स ने वो पैकेट को बड़ी चालाकी के साथ वहां से हटा दिया। परिजनों ने बाद में इसकी शिकायत अस्‍पताल के सहायक अधीक्षक से की।
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