रानू मंडलः ऐसी शोहरत कि 10 साल पहले छोड़ कर गई बेटी दौड़ी चली आई

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उम्मीद पे दुनिया कायम है, सपने सभी संजोते हैं, सपने देखना मत छोड़ो क्योंकि सपने सच होते हैं, वाकई, सपने सच होते हैं। ये सपने ही तो हैं जो किसी इंसान को मुकाम देते हैं, जीने की राह बताते हैं, सबके अपने सपने होते हैं और सब उसे पाने का भरसत प्रयास करते हैं। जिसके सपने पूरे हुए वह फर्श से अर्श तक पहुंच गया और जिसके पूरे नहीं हुए वह पूरे करने में लगा है, हम आप और सभी सपनों को पूरा करने में लगे हैं और रानू मंडल इसकी सच्चाई के रूप में हमारे आपके सामने हैं।
10 सालों के ज्यादा वक्त तक रेलवे स्टेशन पर अपनी जिंदगी का दांव खेल रही रानू मंडल अपनी आवाज को अपने जीने का जरिया बना रखा था। इसी आवाज ने उन्हें 10 सालों तक जिंदा रखा केवल इस आशा में कभी तो किश्मत बदलेगी, किश्मत बदली और आज रानू मंडल किसी पहचान की मोहताज नहीं, लेकिन इन 10 सालों में उनके साथ क्या-क्या नहीं हुआ, न खाने को रोटी थी न रहने को छत न किसी का सहारा न कोई अपना बस एक आवाज के सहारे उन्होंने 10 साल काटे और एक दिन एक युवक ने उनकी आवाज का वीडियो बनाया और शेयर कर दिया फिर यहीं से बदल गई रानू मंडल की जिंदगी,लेकिन 10 साल पहले क्या हुआ था…
असल में रानू मंडल का एक सहारा थी उनकी बेटी, लेकिन जब उनकी माली हालत बिगड़ी तो वह उनका साथ छोड़कर चली गई। जब रानू मंडल की बेटी ने उनका साथ छोड़ा था तब उनकी उम्र करीब 50 साल थी और कमाई का कोई जरिया भी नहीं था। ना ही उनके पास कोई ऐसी संपत्ति थी जिसके सहारे उनकी जीविका चल पाती। इसके पहले रानू मंडल के पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया जबकि दूसरे पति का निधन हो गया। अब परिवार में उनकी अकेली बेटी बची थी। लेकिन वक्त के साथ उसने भी रानू मंडल का साथ छोड़ दिया। बीते करीब 10 सालों से रानू अकेले ही गुजर-बसर कर रही हैं। इस दौरान उनकी हालत इतनी खराब हुई कि रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर दो-जून की रोटी जुटानी पड़ी।
असल में रानू मंडल का एक सहारा थी उनकी बेटी, लेकिन जब उनकी माली हालत बिगड़ी तो वह उनका साथ छोड़कर चली गई। जब रानू मंडल की बेटी ने उनका साथ छोड़ा था तब उनकी उम्र करीब 50 साल थी और कमाई का कोई जरिया भी नहीं था। ना ही उनके पास कोई ऐसी संपत्ति थी जिसके सहारे उनकी जीविका चल पाती। इसके पहले रानू मंडल के पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया जबकि दूसरे पति का निधन हो गया।
अब परिवार में उनकी अकेली बेटी बची थी। लेकिन वक्त के साथ उसने भी रानू मंडल का साथ छोड़ दिया। बीते करीब 10 सालों से रानू अकेले ही गुजर-बसर कर रही हैं। इस दौरान उनकी हालत इतनी खराब हुई कि रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर दो-जून की रोटी जुटानी पड़ी।
बहरहाल रेलवे स्टेशन की वह आवाज आज सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही है। इस आवाज को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली बॉलीवुड सिंगर हिमेश रेशमिया ने तो स्टार सलामान खान ने उन्हें 55 लाख का मकान देने का ऐलान कर दिया। दो जून की रोटी के लिए तरसने वाली रानू मंडल अब लाखों की मालकिन हैं।
इस शोहरत ने एक बड़ा काम किया। उनकी बेटी जो 10 साल पहले उनसे रिश्ता तोड़कर चली गई थी अब लौट आई है। रानू मंडल के मां का ह्रदय बेटी को तो गले लगा लिया लेकिन सोशम मीडिया ने ऐसी बेटी पर जमकर भड़ास निकाली है।
लोगों ने जमकर निकाली भड़ास
रानू मंडल की बेटी की वापसी पर लोगों ने बेटी को कसूरवार ठहराया। लोगों ने कहा, बेटी ने उस वक्त मां का साथ छोड़ दिया जब उसे किसी के सहारे की जरुरत थी। एक यूजर ने लिखा है कि कौन कहता है बेटियां ही मां का सहारा बनती हैं, यह एक उदाहरण हैं जब एक बेटी ने मां को रास्ते पर छोड़ दिया। एक अन्य यूजर ने लिखा, बेटी ने उन्होंने इसलिए छोड़ दिया था कि उनके पास पैसे नहीं थे और वह अच्छी नहीं दिखती थीं। तरुण रॉय लिखते हैं कि रानू मंडल रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर रहने वाली एक भिखारी जो अपनी गायन प्रतिभा के कारण प्रसिद्ध हो गई, उसके परिवार ने, उसे छोड़ दिया था। यह उसकी बेटी के लिए शर्म की बात है।
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