जम्मू-कश्मीर में परिसीमन हुआ तो टूट जाएगी अलगाववादियों की कमर, बैठक जारी

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जम्मू कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग की अहम बैठक चल रही है। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत कई अधिकारी मौजूद हैं। परिसीमन पर बैठक में दोनों चुनाव आयुक्त भी मौजूद हैं। बता दें केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत प्रदत्त कानूनों को खत्म करते हुए जम्मू कश्मीर पुर्नगठन 2019 विधेयक को पेश किया। इस विधेयक के मुताबिक जम्मू कश्मीर को अब केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा होगा। लद्दाख बगैर विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश होगा।
अगर जम्मू-कश्मीर में परिसीमन हुआ तो राज्य के तीन क्षेत्रों… जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में विधानसभा सीटों की संख्या में बदलाव होगा। परिसीमन के बाद जम्मू और कश्मीर के विधानसभा क्षेत्रों का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा। जम्मू और कश्मीर की राजनीति में आज तक कश्मीर का ही पलड़ा भारी रहा है, क्योंकि विधानसभा में कश्मीर की विधानसभा सीटें, जम्मू के मुकाबले ज्यादा हैं।
अगर परिसीमन होता है और जम्मू की विधानसभा सीटें बढ़ती है, तो अलगाववादी मानसिकता के नेताओं की स्थिति कमज़ोर होगी और राष्ट्रवादी शक्तियां मजबूत होंगी। दरअसल किसी राज्य के निर्वाचन क्षेत्र की सीमा करने के लिए संविधान के अनुसार हर 10 वर्ष में परिसीमन करने का प्रावधान है। लेकिन सरकारें ज़रूरत के हिसाब से परिसीमन करती हैं।
जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में कुल 87 सीटों पर चुनाव होता है। 87 सीटों में से कश्मीर में 46, जम्मू में 37 और लद्दाख में 4 विधानसभा सीटें हैं। परिसीमन में सीटों के बदलाव में आबादी और वोटरों की संख्या का भी ध्यान रखा जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर परिसीमन होता है तो जम्मू की सीटें बढ़ जाएंगी और कश्मीर की सीटें कम हो जाएंगी।
बतादें कि 2002 के विधानसभा चुनाव में जम्मू के मतदाताओं की संख्या कश्मीर के मतदाताओं की संख्या से करीब 2 लाख ज्यादा थी। जम्मू 31 लाख रजिस्टर्ड वोटर थे। कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर सिर्फ 29 लाख वोटर थे।
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