अयोध्या विवादः मुस्लिम पक्षकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, जानिए क्या कहा

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अयोध्या विवाद, 23 दिसंबर 1949 को तब शुरु हुए इस विवाद के पटाक्षेप का वक्त नजदीक आ रहा है। अयोध्या विवाद की सुनवाई के 33 वें दिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार मीनाक्षी अरोड़ा की उस दलील को सिरे से नकार दिया जिसमें उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वर्ष 2003 की रिपोर्ट पर सवाल खड़ा करते हुए उसे महज एक राय बताया था। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।
ASI की रिपोर्ट महज एक साधारण राय नहीं हो सकती
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साल 2003 की रिपोर्ट महज एक‘साधारण राय’ नहीं हो सकती है। पुरातत्ववेत्ता खुदाई में मिली सामग्री के बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा सौंपे गये काम पर अपनी राय दे रहे थे। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा सुशिक्षित और अध्ययनशील विशेषज्ञों द्वारा ASI की रिपोर्ट से निष्कर्ष निकाला गया है।
मुस्लिम पक्षकार मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा…
मुस्लिम पक्षकार ने अयोध्या विवाद के 33 वें दिन अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होने ASI की रिपोर्ट को महज एक राय करार देते हुए कहा, इस राय को पुख्ता सबूत नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा ASI की 2003 की रिपोर्ट एक कमजोर साक्ष्य है, इसकी पुष्टि के लिए उन्हें पुख्ता साक्ष्य की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट अदालत के लिये बाध्यकारी नहीं है क्योंकि यह प्रकृति में सिर्फ ‘परामर्शकारी’ है।
चबूतरा संभवत: पानी का हौद था
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, ‘यह रिपोर्ट सिर्फ एक राय है और इससे कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण को इस बारे में अपनी रिपोर्ट देने के लिये कहा गया था कि क्या उस स्थल पर पहले राम मंदिर था या नहीं। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में कुछ जगह कहा गया है कि बाहरी बरामदे में राम चबूतरा संभवत: पानी का हौद था। इस मामले में अब 30 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।
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