कृषि अगर लाभदायक नहीं बनी तो किसान खेती करना छोड़ देंगेः उपराष्ट्रपति

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लाभकारी खेती पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों को अनिवार्य रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुसंधान के परिणाम सीधे किसानों तक पहुंचे…

हैदराबाद। कृषि कार्य अगर लाभदायक न बनाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब देश कृषक कृषि कार्य छोड़ देंगे। यह बातें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने स्वर्ण भारत न्यास परिसर में रायथू नेस्थम सालाना पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ कृषि लागत कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उर्वरकों, कीटनाशकों, बिजली और पानी के अंधाधुंध उपयोग पर भी अंकुश लगाने की आवश्यकता है।
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उपराषट्रपति ने कहा कि देश में लाभकारी खेती पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों को अनिवार्य रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुसंधान के परिणाम सीधे किसानों तक पहुंचे। उपराष्ट्रपति ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक सुभाष पालेकर द्वारा परिवर्तित शून्य बजट प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की सलाह दी।
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उन्होंने कहा, “इससे कृषि लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी और किसानों को एक स्थिर आय उपलब्ध कराने में यह सहायक होगी।उन्होंने कहा कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से उपभोक्ताओं को बचाया जा सकेगा।उन्होंने कहा कि सामान्य खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती के लिए सिर्फ 10 प्रतिशत पानी और बिजली की आवश्यकता होगी।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक अध्ययन से यह प्रकाश में आया है कि ऐसे किसानों ने आत्महत्या नहीं की है जो कुक्कुट पालन, दुग्ध उत्पादन और मछली पालन जैसे संबंधित कार्यकलापों से जुड़ रहे हैं। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने एक नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का भी उद्घाटन किया और लोगों से स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही।
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