इस वैश्विक मंच से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान, जानिए क्यों हैरान हो गए 196 देश

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पर्यावरण संरक्षण को लेकर विश्व के अनेक देशों में सम्मान पा चुके भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ी बात कही है। दरअसल ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में चल रहे 12 दिवसीय कॉप-14 कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में 196 देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इन सब के बीच पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता जाहिर की।
पीएम मोदी ने पर्यावरण के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता
पीएम मोदी ने इस वैश्विक मंच से विश्व के 196 देशों के सामने पर्यावरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और नष्ट होती जैव विविधता तथा मरुस्थलीकरण पर सदस्य राष्ट्रों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा अगर ये खतरे ऐसे ही बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में ये मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं।
2.6 करोड़ हेक्टेअर जमीन को बनाया जाएगा उपजाऊ
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पर्यावरण को लेकर भारत द्वारा उठाए जा रहे कदम की भी जानकारी मुहैया कराई। उन्होंने कहा भारत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेअर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए वचनबद्ध है। पहले ये लक्ष्य 2.1 करोड़ हेक्टेअर का था। पीएम मोदी ने कहा, 2015-2017 के बीच भारत में पेड़ और जंगल के क्षेत्रफल में आठ लाख हेक्टअर की भढ़रोत्तरी हुई है।
पर्यावरण को बचाने के लिए व्यवहार में लाना होगा परिवर्तन
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत की अपनी भूमि के प्रति आदर को भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा, भारत के संस्कारों में धरती पवित्र है, हर सुबह धरती पर पैर रखने के पूर्व हम घरती मां से माफी मांगते हैं उन्हें प्रणाम करते हैं। पीएम ने कहा, वर्तमान समय में पूरे विश्व को जलवायु परिवर्तन के प्रति नकारात्मक सोच के परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, बारिश, बाढ़ और तूफान नकारात्कम सोच के परिणामों की वजह बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा।
क्या है कॉप-14
कॉप-14 सम्मेलन 2 सितंबर को शुरू हुआ था जिसमें 196 देशों और यूरोपीय संघ के करीब 8 हजार लोग हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का मकसद बढ़ते रेगिस्तान, सूखे और भूमि के क्षरण को रोकना है। कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यूएनडीपी और यूएनईपी से जुड़े तमाम सदस्य देश हिस्सा ले रहे हैं।
साल 1994 में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण प्रतिरोध सभा (UNCCD) का गठन किया गया था। इसके तहत मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए दस्तावेजों को जमा करने और इसके लिए कदम उठाने का मकसद तय हुआ था। साथ ही भूमि प्रबंधन के जरिए 196 देशों को साथ लेकर इस समस्या को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कॉप हर दो साल में ऐसा अधिवेशन आयोजित करता है जिसमें पिछले कार्यों की समीक्षा और आगे की रणनीति पर फैसले लिए जाते हैं।
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