देश के नाम राष्ट्रपति का संबोधनः बेटियों को न्याय-जम्मू-कश्मीर के लोगों को समान अधिकार

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भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश के नाम अपने संबोधन में देश से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने 5 अगस्त 2019 को सरकार के ऐतिहासिक फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा इस बदलाव से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लोग लाभान्वित होंगे ऐसा मेरा विश्वास है।
राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में 72 वर्ष पूरे कर रहे हैं। अब से कुछ हफ्तों में, 2 अक्टूबर को, हम अपने राष्ट्र को आजाद कराने के सफल प्रयास के मार्गदर्शक, हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाएंगे।
देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा…
-हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में 72 वर्ष पूरे कर रहे हैं
-2अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाएंगे
-5 अगस्त 2019 को सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया
-इस बदलाव से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को होगा फायदा
-वे भी देश सभी अधिकारों और सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे
-वे भी अब समानता को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील क़ानूनों और प्रावधानों का उपयोग कर सकेंगे
-शिक्षा के अधिकार कानून के जरिए सभी बच्चों को इसका लाभ सुनिश्चित किया जाएगा
-RTI के जरिए लोग जनहित से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे
-वंचित रहे वर्गों के लोगों को शिक्षा व नौकरी में आरक्षण तथा अन्य सुविधाएं मिलेंगी
-तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में डालने से हमारी बेटियों को न्याय मिलेगा
देश के मतदाताओं को दी बधाई
-विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के मतदाताओं को बधाई
-मतदाताओं के उत्साह ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया
-उनका बड़ी संख्या में मतदान केन्द्रों पर पहुंचना लोकतंत्र में विश्वास को दर्शाता है
-राज्यसभा और लोकसभा के सत्र सफल रहे
-इन सत्रों में कई महत्वपूर्ण बिल पास हुए
-मैं आशा करता हूं कि आने वाले 5 सालों में सदन के सत्र इसी तरह पूरे होंगे
विज्ञान के साथ संस्कृति हमारी विशेषता
-विज्ञान के साथ संस्कृति बनाए रखना हमारी विशेषता है
-हमारी संस्कृति की यह विशेषता है
-विज्ञान के साथ ही हम प्रकृति के सभी जीवों के लिए प्रेम और करुणा का भाव रखते हैं
-बाघों की तीन चौथाई आबादी को हमने सुरक्षित बसेरा दिया है
-मुझे विश्वास है कि आखिरी वक्त के लिए भारत, अपनी संवेदनशीलता बनाए रखेगा
-भारत अपने आदर्शों पर अटल रहेगा और अपने मूल्यों को संजोकर रखेगा
-भारत अपने साहस की परंपरा को आगे बढ़ाएगा
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