महात्मा गांधीः जिन्होंने लोगों को प्रेरित किया, प्रभावित तो सारी दुनिया थी

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‘देदी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती से संत तूने कर दिया कमाल’। 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे मोहन दास ने वाकई कमाल कर दिया। अहिंसक विरोध का उनका प्रयोग आज पूरी दुनिया में प्रासंगिक है। दक्षिण अफ्रिका में भारतीयों के अधिकार के लिए संघर्ष के दौरान स्व शुद्धीकरण और सत्याग्रह से शुरु उनका अहिंसक विरोध प्रतिरोध का अबतक का सबसे शक्तिशाली हथियार बना जिसे आज पूरी दुनिया सलाम करती है। ये वो प्रेरणा थी जिसने भारत में भी अलख जगाने का काम किया और गुलामी में जकड़े भारत को आजाद हवा में सांस लेने का अवसर दिया। आज (बुधवार 2 अक्टूबर 2019) को महात्मां गांधी की 150वीं जयंती है।
प्रस्तुत है महात्मा गांधी के बारे पीएम मोदी उस भाषण के अंश जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के इकोनॉमिक एंड सोशल कौंसिल चेंबर को संबोधित करते हुए दिया था…
अहिंसा की शक्ति से पुराने साम्राज्य की चूलें हिला दीं
महात्मा गांधी भारतीय थे ये सत्य है लेकिन वह केवल भारत के नहीं थे। ऐसा कहीं देखने को नहीं मिलता कि जिस शख्स का शासन प्रशासन से कोई मतलब न हो वो सत्य व अहिंसा की शक्ति से सदियों पुराने साम्राज्य को चूलें हिला दीं बल्कि असंख्य देशभक्तों में आजादी की आशा जागृत कर दिया। महात्मा गांधी ऐसे व्यक्ति थे जो सत्ता से दूर रहते हुए भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसते हैं। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि जिन लोगों से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई वह भी उनकी अद्भुत प्रतिभा के मुरीद हैं। वह मार्टीन लूथर किंग हों या नेल्सन मंडेला उनके विचारों का आधार महात्मा गांधी ही थे।
लोकतंत्र की असली चेहरा दिखाया, स्वावलंबी बनें
आज लोकतंत्र की परिभाषा बदल गई है, आप अपनी मर्जी से अपनी सरकार चुनते हैं जो जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतर सके, लेकिन महात्मा गांधी का लोकतंत्र इससे इतर था। उन्होंने लोकतंत्र की असली शक्ति को पहचाना था, उन्होंने दिशा दिखाई, जिसमें लोग शासन पर निर्भर न हों, स्वावलंबी बने। महात्मा गांधी भारत की आजादी की लड़ाई के केन्द्र में थे, लेकिन इस बात पर भी गौर करना होगा कि अगर वह आजाद भारत में जन्म लिए होते तो क्या होता? उन्होंने देश का आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई केवल यही बड़ी बात नहीं है, महात्मा गांधी ने ऐसी व्यवस्था दी है जिसमें लोग सरकार पर निर्भर न होकर स्वावलंबी बन कर देश सेवा करें।
गांधी जी का विजन चुनौतियों के समाधान का बड़ा माध्यम
गांधी जी यह विजन आज भारत के सामने बड़ी चुनौतियों के समाधान का बड़ा माध्यम बन रहा है। बीते पांच सालों में हमने जनभागीदारी को प्राथमिकता दी है, चाहे वह स्वच्छ भारत अभियान हो या डिजिटल इंडिया हो, भारत के लोग इन अभियानों का नेतृत्व आगे बढ़कर खुद कर रहे हैं।
मेरा जीवन ही मेरा संदेश
महात्मा गांधी जी कहा करते थे कि उनका जीवन ही दुनिया के लिए संदेश है। गांधी जी ने कभी अपने जीवन से किसी को प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया, लेकिन उन्होंने सदैव प्रेरित करने का काम किया। गांधी जी के जीवन से पूरी दुनिया प्रभावित है। आज हम कैसे प्रभावित करें ऐसी दुनिया में हम जी रहे हैं, लेकिन गांधी जी का विजन था कैसे प्रेरित किया जाए।
एलिजाबेथ भी उनसे प्रभावित थीं
गांधी जी ने लोगों को कैसे प्रेरित किया इसका एक उदाहरण आपके सामने रखना चाहता हूं। कुछ वर्ष पहले मैं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से मिला था, उन्होंने बेहद भावुकता के साथ एक रुमाल दिखाया, वे खादी से बना था जिसे गांधी जी ने उन्हें शादी के समय उपहार में दिया था। यह प्रेरणा ही थी कि उनकी नजर में भी खादी का क्या महत्व है, जो हाथों के कातकर एक-एक धाने को बुनकर तैयार किया गया था, शायद संदेश यह था कि देश को भी इसी धागे की तरह पिरो कर रखा जा सकता है।
सिद्धान्तों के प्रति प्रतिबद्ध थे गांधी जी
सोचिए जिसके साथ सिद्धान्तों का संघर्ष था उसके साथ संबंधों को लेकर कितनी संवेदनशीलता भी थी। वो उनका भी भला चाहते थे जिनसे उनका विरोध था या जो उनका विरोध करते थे, जिनके साथ उनकी आजादी की लड़ाई थी। सिद्धान्तों के लिए इसी प्रतिबद्धता ने गांधी जी का ध्यान ऐसी सात विकृतियों की तरफ खींचा जिनके प्रति सभी को जागरुक रहना चाहिए।
गांधी जी के सात सिद्धान्त हमारे मार्ग दर्शक
श्रम के बगैर समृद्धि, विवेक रहित आनंद, चरित्र बिना ज्ञान, मूल्य रहित व्यापार, संवेदनाशून्य विज्ञान, बलिदान बिना धर्म और सिद्धान्त रहित राजनीति। चाहे जलवायु परिवर्तन हो या फिर आतंकवाद, भ्रष्टाचार हो या फिर स्वार्थपर सामाजिक जीवन, गांधी जी के ये सिद्धान्त मानवता की रक्षा के लिए मार्गदर्शक की तरह काम करते रहेंगे।
आज भी हमारे साथ हैं गांधी जी अपने सिद्धान्तों के साथ
मुझे विश्वास है कि गांधी जी का दिखाया ये रास्ता बेहतर विश्व के निर्माण में प्रेरक का काम करेगा। मै समझता हूं कि जब तक मानवता के साथ गांधी जी के विचारों का ये प्रवाह सदा बना रहेगा, तब तक गांधी की प्रेरणा और प्रासंगिकता भी हमारे बीच रहेगी।
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