देखिए सरकार, आपके राज में ये बच्ची यूं ही भूखे पेट सो जाती है…

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फोटो- जी न्यूज हिंदी
पेट की भूख कितनी भयावह होती है, ये बात उस मासूम की आंखों में साफ दिखता है। हर दिन उसे अपनी भूख पर काबू पाने के लिए जंगलों को बीच जाना होता है, लकड़ियां काटनी पड़ती है। इन लकड़ियों से उसे 30 से 40 रुपए मिल जाते हैं तो उसके पेट की आग कुछ हद तक शांत हो पाती है। मां ने मुफलिसी से तंग आकर खुदकुशी कर ली तो पिता मां के गुजरने के कुछ दिन बाद ही दुनिया छोड़ दिया। ये है केन्दुझर की 11 साल की बच्ची सीमा मुंडा।
भूख की तड़प और कुपोषण से जंग लड़ता बचपन
11 साल की सीमा मुंडा सदर ब्लॉक महादेईपड़ा पंचायत सलरापेंठ गांव की है, आइए सरकार हम आपको दिखाते हैं भूख की तड़प और कुपोषण से जंग लड़ता बचपन जिसकी पहचान है। बदहाली आंगन की मेहमान। हम सरकार को इसलिए बता रहे हैं कि अनेक बार आप हमारे आंगन में आकर हमारी बेबसी की नंगी तस्वीर के जरिए हमारे हक हकूक की आवाज बुलंद की थी। सरकार से लेकर प्रशासन तक को आपने हिला दिया था। तब आप सांसद थे, आज आप सरकार हैं।
क्योंकि आपने विश्वास दिलाया है
हमें कुछ सुकून तब मिला जब आप सत्ता संभालने के बाद भी हमारे दर्द को नहीं भूला पाए हैं। कुपोषण से जंग लड़ते बचपन को जवानी के दहलीज तक जाने की राह दिखाई। हम तभी से आपका इंतजार कर रहे थे कि आप आएंगे तो हमारी बदहाली दूर होगी, हमे भी समाज के लोग जानेंगे कि एक इंसान ये भी है। अब तक वादों पर छले जाते रहे हैं, लेकिन आपके कदम पड़ेंगे तो विकास की सही राह हमारे दर तक आएगी। क्योंकि आपने विश्वास दिलाया है तो उसे पूरा करेंगे। सरकार..आइए आपका इंतजार है।
भूख शांत करने के लिए पेट पर गिले कपड़े रख सो जाती है
दरअसल केन्दुझर जिला की 11 साल की इस बच्ची का राशन कार्ड और आधार कार्ड के लिंक न होने से तमाम परेशानिया हैं। जन्म के बाद ही मां छोड़ के चली गई, कुछ साल बाद पिता के मरने के बाद बच्ची अनाथ हो गई। बच्ची दादा के पास रहती थी। दादा को राशन मिलता था। दादा के मौत के बाद वह राशन भी मिलना बंद हो गया। जो 5 किलो राशन मिलता था वह भी बंद हो गया। पेट पालने के लिए बच्ची जंगल जाकर लकड़ी काटती और 30 से 40 रुपए प्रतिदिन कमाती है। बारिश या तबियत खराब होने पर कई दिनों तक भूखों रहना पड़ता है। उस दिन बच्ची पेट पर गीला कपड़ा रखकर सो जाती है।
क्या है स्थिति
पड़ोसी की तरफ से मिले अनाज से वह गुजारा कर रही है। गांव के सरपंच का कहना है कि, हम नियमों के अनुसार काम करते हैं जिनका राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं है उन्हें राशन नहीं दिया जाता है लेकिन बच्ची को हम अपनी तरफ से कुछ चावल दे दिया करेंगे। फिर भी बच्ची को कार्ड बनाना जरुरी है। आइए सरकार अपने राज की इस तस्वीर को भी देख लीजिए…
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