पाकिस्तान का एक और विभाजन, सेना के दमन के खिलाफ ‘पश्तून आंदोलन’

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नजरिया…

पठानों के पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट को लगातार मिलने वाले समर्थन और विरोध प्रदर्शनों में जुटे लाखों लोगों को देखकर पाकिस्तानी सरकार और सेना दोनों घबराए हैं, उन्होंने आरोप लगाना शुरु कर दिया है कि इस आंदोलन को भारत और अफगानिस्तान की खूफिया एजेंसियों की तरफ से फंडिंग की जा रही है…
पख्तून नेताये पाकिस्तान की नियति है कि उसे एक बार फिर से विभाजित होना है। दरअसल, पाकिस्तान की आजादी के साथ उठी एक अलग देश की मांग अब तेज हो गई है। पठानों का पश्तून तफ्फूज मूवमेंट इतना तेज हो गया है पाकिस्तान सरकार और सेना दोनों में घबरहाट है। वो अपने लिए एक नया देश चाहते हैं।
पाकिस्तानी पठानों का अलग देश की मांग को लेकर उठा यह आंदोलन पाकिस्तानी सेना को जबरदस्त तरीके से चुनौती दे रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है इनके विरोध प्रदर्शनों में लाखों लोग शिरकत कर रहे हैं और अलग देश की मांग कर रहे हैं।

पाकिस्तान विभजन

पश्तूनों के इस व्यापक विरोध प्रदर्शनों को देखकर विदेशी मीडिया अंदाजा लगा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान एक बार फिर टूटने के कगार पर आ रहा है। हांलाकि पाकिस्तान की सेना इनपर लगातार दबाव बना रही है और इस विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वालों को धमका रही है। इन विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सेना ने कहना शुरु कर दिया है कि यह विरोध अफागानिस्तान के उकसावे पर किया जा रहा है जो पाकिस्तान को अस्थिर करना चाहते हैं।
पठान पश्तूनों के अलग देश की मांग को पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रांत से व्यापक समर्थन मिल रहा है। बीते दो सालों से पश्तून तहफ्फूज मूवमेंट को लाखों लोगों का समर्थन मिल रहा है। उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ इस बात को तस्दीक करती है कि पश्तून किस कदर अलग देश की मांग को लेकर संघर्ष को अमली जामा पहना रहे हैं। उधर पाकिस्तान की इस बात को लेकर आलोचना की जाती है कि वह आंदोलन को दबाने के लिए पश्तूनों का जबरदस्त तरीके दमन कर रही है।

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पश्तूनो के इस आंदोलन पर पाकिस्तानी सरकार और सेना दोनों एक मत हैं और आरोप लगा रहे हैं कि इनके आंदोलन को सक्रिय रखने के लिए इन्हें भारत और अफगानिस्तान की खूफिया एजेंसियों से फंडिंग की जा रही है।
वहीं दूसरी तरफ पश्तून तहफ्फूज मूवमेंट का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी युद्ध के नाम पर लगातार पश्तूनों का दमन कर रही है। महिलाओं,पुरुषों का अपहरण और यहां तक कि उनकी हत्याएं भी पाकिस्तान सेना के द्वारा किया जा रहा है। पीटीएम का कहना है कि जिस तरह से इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है उससे तो यही लगता है कि पाकिस्तानी सेना से सताए हुए लोग अब अलग देश लेकर रहेंगे।
पाकिस्तान की सेना तमाम कोशिश के बाद भी इस आंदोलन को दबाया नहीं जा सका है।

पश्तून

1947 में पाकिस्तान बनने के बाद से ही पश्तून देश के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पश्तून आबादी रहती है। पाकिस्तान शुरू से ही पश्तून बहुल एक अलग देश के विचार को खारिज करता रहा है। विश्लेषकों की माने तो पाकिस्तानी अधिकारी इलाके में इस्लामीकरण के जरिए “पश्तूनिस्तान” के आंदोलन को दबाना चाहते हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष राजनेता और कार्यकर्ता कर रहे हैं।
इस आंदोलन के नेता के रूप में मंज़ूर पश्तीन नाम का एक युवा पश्तून नेता लगातार सुर्खियों में है। ये वो इलाका भी है, जहां तालिबान की पकड़ मजबूत है। 24 साल के मंज़ूर पश्तीन पाकिस्तान के युद्ध ग्रस्त इलाके दक्षिणी वज़ीरिस्तान से ताल्लुक रखते हैं। यह इलाका पाकिस्तानी तालिबान की मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता रहा है।

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इस इलाके के लोग पख़्तूनिस्तान या पठानिस्तान के नाम से नया देश बनाना चाहते हैं। पख़्तूनिस्तान का अधिक हिस्सा अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की जमीन पर लेकिन भारत और ईरान का भी छोटा सा हिस्सा इसमें शामिल है।

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पख़्तूनिस्तान शब्द का उपयोग अंग्रेज़ों ने पहली बार किया था, जब वह भारत पर शासन कर रहे थे, ब्रिटिश राज के लोग पश्चिमी-उत्तरी क्षेत्रों को पख़्तूनिस्तान कहा करते थे। वैसे ये पाकिस्तान का वो इलाका भी है, जहां जमकर बंदूक और पिस्तौलें तैयार की जाती हैं। खैबर पश्तून ख्वाह प्रांत के शहर दर्रा आदम खेल को दुनिया का सबसे बड़ा गैरकानूनी बंदूक बाजार भी कहा जाता है।
न्यूज सोर्सः न्यूज 18 इंडिया
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