कैट ने कहा, सस्ते सामानों का भ्रम फैलाकर चीन ने जमाया भारतीय बाजारों पर कब्जा

Last Updated : by

28 Views

भारत व चीन के 80 प्रतिशत तैयार माल के दाम लगभग बराबर

बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं भारतीय सामान, जबकि चीनी सामान होते हैं यूज एंड थ्रो वाले

दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर चीन को दे सकते हैं करारा जवाब

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच युद्घ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। वहीं भारत में चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार शुरू हो गया है। चीनी सामानों के बहिष्कार के अभियान में देश के खुदरा व्यापारियों के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कैट अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बीच कैट की ओर से दावा किया गया है कि, लोगों के बीच यह भ्रम फैला हुआ है कि चीन का सामान सस्ता होता है। कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का मानना है कि चीनी सामानों को लेकर लोगों के बीच यह भ्रम फैल गया है कि वह सस्ते होते हैं। जबकि तैयार माल की बात की जाए तो, तकरीबन 80 फीसदी उत्पाद ऐसे हैं, जिसमें भारत और चीन के सामान का मूल्य लगभग बराबर है।

भारत के उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर, चीन के सामान यूज एंड थ्रो वाले
दोनों देशों के बीच सीमा पर तनातनी के दौरान भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर बड़ी मुहिम चल रही है। चीनी सामानों के आयात का बड़ा केंद्र भारतीय बाजार हैं। ऐसे में चीनी सामानों का बहिष्कार कर भारत चीन को बड़ी आर्थिक चोट पहुंचा सकता है। चीनी माल के बहिष्कार अभियान में प्रमुख भूमिका निभा रहे कैट के महासचिव खंडेलवाल का कहना है कि, भारत व चीन के सामानों के मूल्य के अलावा अगर बात उत्पादों के गुणवत्ता की हो तो भारत उत्पादों की गुणवत्ता चीन के सामानों से कहीं बेहतर होती है। चीन के सामान जहां यूज एंड थ्रो वाले होते हैं, वहीं भारतीय सामानों के साथ ऐसा नहीं और इनके साथ गारंटी भी होती है।
सस्ते सामान के नाम पर भारतीय बाजारों में छाया चीनी सामान
कैट महासचिव खंडेलवाल का कहना है कि चीन के सामान सिर्फ सस्ते के नाम पर भारतीय बाजारों में छाए हुए हैं। जबकि चीन के पास कोई राकेट साइंस नहीं है। चीन ने उपभोकताओं के व्यवहार से ही भारतीय बाजार पर सस्ते उत्पादों के जरिए कब्जे की बात सीखी है। मगर, अब चीजें बदल गयी हैं। अब लोग न तो चीनी सामान खरीदना चाहते हैं और न ही व्यपारी इसे बेचना चाहते हैं।
दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर चीन को दे सकते हैं मात
खंडेलवाल ने कहा कि चीन से हम तैयार माल, कच्चे माल, कलपुर्जे और प्रौद्योगिकी उत्पादों का आयात करते हैं। ऐसे में हम सिर्फ किचन, चमड़े के बैग व फुटवियर का सामान ही चीन से मंगाना बंद कर दें तो चीन पर हमारी निर्भरता करीब 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। वहीं अगर हम ताइवान, जापान, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जर्मनी व वियतनाम से सामानों का आयात बढ़ा लें तो भी चीन को जवाब दे सकते हैं।
आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार, उद्योग और व्यापार को मिलकर करना होगा काम
खंडेलवाल ने कहा, चीन की योजना रही कि वह अपने सामान को किफायती बताकर भारतीय बाजारों में पाटता रहा। मगर अब लोगों की धारणा चीनी सामानों के प्रति बदल रही है। 10 जून से कैट की ओर से चीनी सामानों के बहिष्कार अभियान के बाद अब बॉलीवुड हस्तियों, क्रिकेट प्लेयरों, मुकेश अंबानी, रतन टाटा जैसे दिग्गज उद्योगपतियों से इस अभियान में सहयोग की अपील की है। खंडेलवाल के मुताबिक, हम चीनी सामाना पर निर्भरत समाप्त कर सकते हैं, बशर्ते सरकार, उद्योग व व्यापार मिलकर काम करें। उनके मुताबिक पहले हम पीपीई किट, मास्क व वेंटिलेटर भी नहीं बनाते थे, मगर आज हमने इनके विनिर्माण में दुनिया के कई अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया है।
उद्योग के लिए प्रत्येक जिले में सरकार चिन्हित करे 50 एकड़ जमीन
खंडेलवाल ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए सरकार उद्योग के लिए प्रत्येक जिले में करीब 50 एकड़ जमीन चिन्हित करे। जहां पर हम विनिर्माण इकाइयां लगा सकते हैं। साथ ही सरकार को उद्योग के लिए सस्ते कर्ज मुहैया कराने होंगे। देश में श्रम सस्ता है, जमीने भी उपलबध हैं और उपभोग के लिए बड़ी आबादी भी है। ऐसे में हम सभी मिलकर काम करें तो कुछ ही सालों में दूसरों पर हमारी निर्भरता समाप्त हो जाएगी और हम आत्मनिर्भर बन सकेंगे।